गाजियाबाद में पालतू कुत्तों के लिए बनेगा UP का पहला सीएनजी शवदाह गृह, धार्मिक रीति से होगा अंतिम संस्कार

प्रस्तावित शवदाह गृह में इच्छुक पशुपालकों की धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। यदि कोई परिवार चाहे तो पंडित की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार कराया जा सकेगा। हालांकि यह सुविधा पूरी तरह पशुपालक की इच्छा पर निर्भर होगी।;

Update: 2026-08-03 08:58 GMT

गाजियाबाद: नगर निगम ने पालतू कुत्तों के अंतिम संस्कार के लिए एक अनूठी पहल की है। नगर निगम प्रदेश का पहला आधुनिक सीएनजी आधारित कुत्ता शवदाह गृह स्थापित करने जा रहा है, जहां पालतू कुत्तों का सम्मानजनक और पर्यावरण अनुकूल अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह सुविधा विजय नगर जोन स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर के पास विकसित की जाएगी। इसके लिए निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा।

पालतू पशुओं को मिलेगी सम्मानजनक विदाई

आज के समय में बड़ी संख्या में लोग अपने पालतू कुत्तों को परिवार का हिस्सा मानते हैं। ऐसे में उनकी मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम विदाई की व्यवस्था नहीं होने से पशुपालकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई लोग निजी स्तर पर अंतिम संस्कार कराते हैं, जबकि कुछ मामलों में उचित व्यवस्था के अभाव में शवों का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो पाता। नगर निगम का मानना है कि इस सुविधा से न केवल पशुपालकों को राहत मिलेगी, बल्कि पशुओं के शवों के सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी।

धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार होगा अंतिम संस्कार

प्रस्तावित शवदाह गृह में इच्छुक पशुपालकों की धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। यदि कोई परिवार चाहे तो पंडित की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार कराया जा सकेगा। हालांकि यह सुविधा पूरी तरह पशुपालक की इच्छा पर निर्भर होगी। नगर निगम का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल शवों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि उन परिवारों की भावनाओं का सम्मान करना भी है, जिनके लिए उनका पालतू पशु परिवार के सदस्य जैसा होता है।

अस्थियों के संग्रह और विसर्जन की भी सुविधा

इस परियोजना की एक विशेषता यह भी होगी कि अंतिम संस्कार के बाद पशुपालकों को अपने पालतू कुत्ते की अस्थियां प्राप्त करने का विकल्प दिया जाएगा। यदि परिवार स्वयं अस्थि विसर्जन करना चाहता है तो अगले दिन अस्थियां प्राप्त कर सकता है। वहीं, यदि कोई पशुपालक एजेंसी के माध्यम से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अस्थि विसर्जन कराना चाहता है, तो यह सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके लिए निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। अंतिम संस्कार के समय ही एजेंसी पशुपालक से पूछेगी कि वे अस्थियां अपने पास रखना चाहते हैं या एजेंसी के माध्यम से उनका विसर्जन कराना चाहते हैं।

पालतू पशुओं के लिए शुल्क, आवारा कुत्तों के लिए मुफ्त सेवा

नगर निगम के अनुसार, पालतू कुत्तों के अंतिम संस्कार के लिए निजी एजेंसी निर्धारित शुल्क वसूलेगी, क्योंकि परियोजना का संचालन पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा। दूसरी ओर, शहर में मृत पाए जाने वाले आवारा कुत्तों का अंतिम संस्कार पूरी तरह निशुल्क किया जाएगा। इससे नगर निगम को शहर में पशुओं के शवों के वैज्ञानिक निस्तारण में भी मदद मिलेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होंगे।

सीएनजी तकनीक से होगा पर्यावरण संरक्षण

शवदाह गृह में पारंपरिक ईंधन की जगह सीएनजी आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी। आधुनिक प्रणाली के कारण अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और वैज्ञानिक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं के शवों के उचित निस्तारण से संक्रमण फैलने की आशंका भी कम होती है और शहरी स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिलती है।

पीपीपी मॉडल पर होगा निर्माण और संचालन

नगर निगम ने इस परियोजना के लिए टेंडर जारी कर दिया है। चयनित निजी एजेंसी निर्माण से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी संभालेगी। निगम अधिकारियों के अनुसार, यह मॉडल बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने में मदद करेगा। उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि पालतू कुत्तों के अंतिम संस्कार के लिए सीएनजी आधारित शवदाह गृह बनाया जाएगा। पशुपालकों की इच्छा पर उनकी अस्थियां सुरक्षित रखी जाएंगी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य आरंभ होने की उम्मीद है।

पशु कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

नगर निगम की यह पहल केवल एक नई सुविधा नहीं, बल्कि शहरी पशु कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे पालतू पशुओं के प्रति लोगों की भावनाओं का सम्मान होगा, साथ ही शवों के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य नगर निकाय भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

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