राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ के खिलाफ चार्जशीट, सीसीटीवी में 85 बार रकम हटाने का दावा
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित गबन के मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस की विवेचना रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), बैंकिंग लेनदेन और बरामदगी को प्रमुख साक्ष्य बनाया गया है।;
अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित गबन के मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस की विवेचना रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), बैंकिंग लेनदेन और बरामदगी को प्रमुख साक्ष्य बनाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला उर्फ शनि 85 बार चढ़ावे की रकम हटाकर छिपाते हुए सीसीटीवी में दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका भी फुटेज में दर्ज होने का दावा किया गया है। रामजन्मभूमि थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 90/2026 में क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विवेचना पूरी करने के बाद 22/23 सितंबर को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 317(2), 317(5), 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) सहपठित धारा 13(2) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावे की रकम हटाने और इसमें एक-दूसरे का सहयोग करने की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अविनाश शुक्ला उर्फ शनि 85 बार रकम चुराकर कपड़ों और कमर में छिपाते तथा चार बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखा। करुणेश पाण्डेय दो बार रकम हटाते और 68 बार सह-अभियुक्तों का सहयोग करते दिखाई दिया।
अनुकल्प मिश्रा पर 56 बार सह-अभियुक्तों की मदद करने, लवकुश मिश्रा पर एक बार रकम हटाने और 52 बार सहयोग करने तथा मनीष कुमार यादव पर 16 बार रकम हटाने और 19 बार सहयोग करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक रमाशंकर मिश्रा भी एक बार चढ़ावे की रकम हटाते हुए फुटेज में दिखाई दिया। चार्जशीट में तत्कालीन गणना कक्ष प्रभारी एवं सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि उनकी मौजूदगी में रकम हटाई जाती रही और उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को आरोपियों की तलाशी लेने से यह कहते हुए रोका कि वे अपने लोग हैं और विश्वसनीय हैं। विवेचना के मुताबिक, चार जून 2026 की रात गणना कक्ष में 2.25 लाख रुपए की नोटों की गड्डियां बाथरूम में छिपाए जाने की घटना सामने आई थी। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने तत्कालीन महासचिव चम्पत राय के मोबाइल पर इसका वीडियो और संदेश भेजा था।
पुलिस के अनुसार, साथी कर्मचारियों को संदेह होने और गेट पर चेकिंग शुरू होने के बाद आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से रकम बाथरूम में छिपाई थी। अगले दिन कारसेवकपुरम में सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद मामले की जानकारी सामने आई और 25 जून को मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए जाने का दावा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अविनाश शुक्ला से 20.39 लाख रुपए नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर तथा सोने-चांदी के आभूषण, करुणेश पाण्डेय से 18.07 लाख, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख और रमाशंकर मिश्रा से 7.32 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। मनीष यादव और रामशंकर यादव से भी नकदी बरामद होने की बात कही गई है। जांच में विटारा ब्रेजा, स्विफ्ट डिजायर, अर्टिगा और बुलेट मोटरसाइकिल समेत कई वाहन जब्त किए गए।
पुलिस ने चार्जशीट में दावा किया है कि कथित गबन की रकम का इस्तेमाल जमीन, मकान, वाहन और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा के पिता के नाम पर कौशलपुरी में करीब 55 लाख रुपए का मकान खरीदा गया, जिसमें कथित तौर पर 54.5 लाख रुपए अपराध से अर्जित रकम के इस्तेमाल का दावा है। इसके अलावा करीब 7.33 लाख रुपए भागवत कथा के आयोजन में खर्च किए जाने की बात सामने आई है।
लवकुश मिश्रा पर पत्नी के नाम 22.52 लाख रुपए की जमीन खरीदने और मकान निर्माण में 20.91 लाख रुपए खर्च करने का आरोप है। रमाशंकर मिश्रा द्वारा 12 लाख रुपए का प्लॉट खरीदने तथा महंगे कैमरे और सोने की अंगूठियां लेने का भी चार्जशीट में उल्लेख है। रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर बेटे के नाम 9.50 लाख रुपए की संपत्ति खरीदने का आरोप लगाया गया है।
चार्जशीट में कुल 133 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इनमें शिकायतकर्ता कृष्णमोहन, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल जी, बैंककर्मी, सुरक्षा कर्मी और फॉरेंसिक ऑडिटर समेत अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, व्हाट्सऐप चैट और सीडीआर को भी विवेचना का हिस्सा बनाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों के बीच लगातार संपर्क और रकम को छिपाने तथा बाहर ले जाने से संबंधित बातचीत की पुष्टि होने का दावा किया गया है। मामले में नामजद सभी आठ आरोपी—अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव—वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
पुलिस ने अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अदालत में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।