प्रीम कोर्ट का सख्त आदेश- मेरठ में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर, उलदेपुर के लिए ज्यूडिशियल कमीशन

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ शहर और उसके आसपास फैले अवैध निर्माणों के मामले में कड़ी कार्रवाई का आदेश देते हुए यूपी आवास एवं विकास परिषद को दिन-रात काम करने का निर्देश दिया है;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-09-24 17:23 GMT

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्यूडिशियल कमीशन के अध्यक्ष नियुक्त

  • मेरठ विकास प्राधिकरण पांच साल से चुप क्यों, क्या अधिकारियों की मिलीभगत हैः कोर्ट

मेरठ। सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ शहर और उसके आसपास फैले अवैध निर्माणों के मामले में कड़ी कार्रवाई का आदेश देते हुए यूपी आवास एवं विकास परिषद को दिन-रात काम करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने 21 सितंबर 2026 को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अवैध निर्माणों का आंकड़ा बेहद चैंकाने वाला और गंभीर है।

कोर्ट ने यूपी आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद द्वारा प्रस्तुत ताजा स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया। रिपोर्ट के अनुसार पहले सील की गई 44 संपत्तियों में से 20 को ध्वस्त कर दिया गया है, जबकि शेष 24 पर भी जल्द कार्रवाई की जानी है।

सेटब बैक क्षेत्रों में अवैध निर्माण वाली 201 संपत्तियों में से 63 का निर्माण हटाया जा चुका है, बाकी 138 पर भी शीघ्र ध्वस्तीकरण सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया। सबसे चैंकाने वाला खुलासा उलदेपुर गांव (मेरठ के बाहरी इलाके) का है, जहां सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियां बन गई हैं।

कोर्ट ने इन्हें देखकर सदमा जताया और पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया को ज्यूडिशियल कमीशन का अध्यक्ष नियुक्त किया। कमीशन को यह जांच करनी है कि जमीन सरकारी है या निजी, मालिक कौन हैं, लेन-देन कैसे हुए, मेरठ विकास प्राधिकरण पांच साल से चुप क्यों रहा और क्या अधिकारियों की मिलीभगत है। यूपी सरकार को सचिवालय सहायता देनी होगी और एक सप्ताह में 35 लाख रुपये रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।

उलदेपुर की हर अवैध संरचना को तुरंत ध्वस्त करें, मलबा भी रोज हटाएं

कोर्ट ने उलदेपुर की हर अवैध संरचना को तुरंत ध्वस्त करने और मलबा रोज हटाने का निर्देश दिया, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। मेरठ को चार जोनों में बांटा गया है। जोन-ए में 16,726 अवैध संरचनाएं चिह्नित हुईं (12,907 आवासीय समेत)। इन्हें खाली करवाकर सील करने और ध्वस्त करने का आदेश दिया गया। जोन-बी, सी और डी की रिपोर्ट अगली सुनवाई पर मांगी गई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर किसी जीर्ण संरचना के गिरने से जान-माल का नुकसान होता है तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

याचिकाकर्ता को धमकियां मिलने कोर्ट ने दी सुरक्षा

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी की 486 संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां रोकी गईं। याचिकाकर्ता को धमकियां मिलने की बात सामने आने पर कोर्ट ने सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और कहा कि ध्वस्तीकरण में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को तय की गई है।

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