नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जजों के सामने बदतमीजी करने और कागज उड़ाकर सीजेआइ को अपशब्द बोलने वाले वकील प्रबल प्रताप सिंह यादव को नई दिल्ली जिला पुलिस की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में उसके साथ मौजूद दूसरे आरोपी चंदर भान को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों ही आरोपी यूपी के रहने वाले हैं और कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली, सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्कामुक्की की और सरकारी कार्य में रुकावट पैदा की। मामले की जांच अब इस पहलू से भी की जा रही है कि घटना पूर्व नियोजित थी या नहीं।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुआ था विवाद
दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह घटना 10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर 13 में हुई। उस समय एक मामले की सुनवाई चल रही थी, जिसमें प्रबल प्रताप सिंह स्वयं अपनी ओर से अदालत में उपस्थित हुए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान उन्होंने अचानक ऊंची आवाज में आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। आरोप है कि उन्होंने न्यायाधीशों के लिए अनुचित संबोधन का इस्तेमाल किया और अदालत में मौजूद न्यायिक अधिकारियों के प्रति असम्मानजनक टिप्पणी की। स्थिति बिगड़ने पर अदालत की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें कोर्ट कक्ष से बाहर ले जाया।
सुरक्षा कर्मियों से धक्कामुक्की का आरोप
पुलिस का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों ने अदालत की व्यवस्था बनाए रखने और आरोपी को शांत कराने का प्रयास किया, तब उसने कथित रूप से सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्कामुक्की की और उनके सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। सुरक्षा स्टाफ की शिकायत के आधार पर तिलक मार्ग थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में मिले पूर्व योजना के संकेत
शुरुआत में घटना के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों और विशेष इकाइयों ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की थी। बाद में आगे की जांच नई दिल्ली जिला पुलिस को सौंपी गई। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे कुछ साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि घटना अचानक नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हो सकती है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं और मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है।
आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से कथित रूप से ऐसे पर्चे बरामद किए हैं, जिनमें आपत्तिजनक शब्द और टिप्पणियां लिखी थीं। पुलिस इन दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका उद्देश्य क्या था और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इस दौरान पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।
मेडिकल परीक्षण भी कराया गया
दिल्ली पुलिस ने बताया कि घटना के बाद दोनों आरोपियों का इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (IHBAS) में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। डॉक्टरों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, तत्काल किसी मानसिक चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पाई गई।
जस्टिस सूर्यकांत की प्रतिक्रिया
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं कभी-कभी हो जाती हैं, लेकिन इससे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका सहित सभी संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और सम्मान बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
पुलिस की जांच जारी
दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह घटना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी या फिर व्यक्तिगत स्तर पर की गई हरकत थी। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, बरामद दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में अंतिम आरोप तय किए जाएंगे और क्या इस प्रकरण में अन्य लोगों की भी संलिप्तता थी।