आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने मानी मायावती की शर्त, राजनीति से संन्यास का किया ऐलान

अपने संदेश में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है और उनके सामने निजी रिश्ते तथा परिवार भी छोटे हैं।;

Update: 2026-09-10 04:08 GMT

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में पिछले कुछ दिनों से चल रहा सियासी और पारिवारिक घटनाक्रम अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद के पार्टी में दोबारा सक्रिय होने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार सुबह मायावती को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। यह घटनाक्रम मायावती की उस शर्त के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह राजनीति से दूर हो जाते हैं, तभी आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है।

मायावती की शर्त के बाद 24 घंटे में बड़ा फैसला

बसपा के भीतर आकाश आनंद की भूमिका को लेकर पिछले कुछ समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इसी बीच बुधवार को मायावती की ओर से अशोक सिद्धार्थ के सामने राजनीति से संन्यास लेने की शर्त रखे जाने की बात सामने आई। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ ने बिना लंबा समय लिए अगले ही दिन अपने फैसले की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए कहा कि वह अब राजनीतिक और सामाजिक जीवन से पूरी तरह अलग हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी अपील की कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की पार्टी में संभावित वापसी से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाए।

‘बहनजी का आदेश मेरे लिए सबसे ऊपर’

अपने संदेश में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है और उनके सामने निजी रिश्ते तथा परिवार भी छोटे हैं। अशोक सिद्धार्थ के मुताबिक वह करीब 35 वर्षों से बसपा, कांशीराम और बाबा साहेब आंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी क्षमता से निभाने की कोशिश की। उन्होंने मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और बड़ी बहन बताते हुए कहा कि उनकी वजह से ही उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचने का अवसर मिला। उन्होंने मायावती द्वारा दिए गए भरोसे और सम्मान को भी अपने लिए महत्वपूर्ण बताया।

पार्टी पर कब्जे के आरोपों को बताया साजिश

अशोक सिद्धार्थ ने अपने बयान में उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें उन पर पार्टी संगठन को प्रभावित करने और आकाश आनंद को गुमराह करने की कोशिश करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी बसपा के हितों के खिलाफ काम नहीं किया। उनके मुताबिक पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक विरोधियों ने उनके खिलाफ इस तरह की बातें फैलाई हैं। उन्होंने दावा किया कि समय के साथ सच्चाई सामने आ जाएगी। साथ ही उन्होंने साफ किया कि आकाश आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी दी जाए या नहीं, इसका फैसला केवल मायावती को करना है।

आकाश आनंद की भूमिका पर अब मायावती का फैसला

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संदेश में आकाश आनंद को मायावती का भतीजा और आनंद कुमार का बेटा बताते हुए कहा कि आकाश लंबे समय तक मायावती की देखरेख में रहे हैं। उन्होंने कहा कि आकाश को संगठन में कोई जिम्मेदारी दी जानी है या नहीं, यह पूरी तरह बसपा प्रमुख का निर्णय है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद आकाश आनंद की बसपा में भूमिका को लेकर मायावती जल्द कोई फैसला कर सकती हैं। हालांकि, आकाश आनंद को नई जिम्मेदारी मिलने की औपचारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।

‘बहुजन मिशन को नुकसान हो तो मैं हटने को तैयार’

अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि अगर मायावती को लगता है कि उनके राजनीतिक या सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने से बहुजन आंदोलन को नुकसान पहुंच रहा है, तो वह तत्काल पीछे हटने को तैयार हैं। उन्होंने मायावती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि उनके लिए पार्टी और बहुजन मिशन सर्वोपरि है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब बसपा के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद आकाश आनंद को संगठन में फिर से अहम जिम्मेदारी मिलेगी? लहाल इस पर अंतिम फैसला मायावती को ही करना है, लेकिन अशोक सिद्धार्थ के अचानक संन्यास के ऐलान ने बसपा की अंदरूनी राजनीति में चल रहे घटनाक्रम को एक नया मोड़ जरूर दे दिया है।

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