जम्मू : जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के छुट्टी पर रहने के दौरान अब लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को जम्मू-कश्मीर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके साथ ही सक्सेना कुछ समय के लिए लद्दाख के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का प्रशासन भी संभालेंगे। यह व्यवस्था मनोज सिन्हा के वापस लौटकर कार्यभार संभालने तक लागू रहेगी।
राष्ट्रपति भवन ने जारी किया आदेश
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, विनय कुमार सक्सेना अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यों का भी निर्वहन करेंगे। यह अतिरिक्त जिम्मेदारी मनोज सिन्हा की अनुपस्थिति और छुट्टी की अवधि तक ही रहेगी। मनोज सिन्हा फिलहाल अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर हैं। उनकी छुट्टी कितने समय की है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों के हवाले से उनके 14 सितंबर को भारत लौटने की बात कही जा रही है। उनके लौटने के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का नियमित प्रभार फिर से उनके पास आने की उम्मीद है।
दो केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी
विनय कुमार सक्सेना के लिए यह अतिरिक्त जिम्मेदारी अहम मानी जा रही है। वह मार्च 2026 में लद्दाख के चौथे उपराज्यपाल बने थे और 13 मार्च को उन्होंने पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वह 2022 से 2026 तक दिल्ली के उपराज्यपाल रह चुके हैं। अब राष्ट्रपति के आदेश के बाद अस्थायी तौर पर उनके पास देश के दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर की प्रशासनिक जिम्मेदारी रहेगी। दोनों क्षेत्रों की भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियां संवेदनशील होने के कारण इस व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिन्हा के भविष्य को लेकर सियासी चर्चाएं
विनय सक्सेना को जम्मू-कश्मीर का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के साथ ही स्थानीय राजनीतिक हलकों में मनोज सिन्हा को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं। हालांकि, उनके पद से हटने या नई जिम्मेदारी मिलने को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। राजनीतिक चर्चाओं में एक संभावना यह जताई जा रही है कि मनोज सिन्हा को भाजपा संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर सक्रिय किया जा सकता है। कुछ अटकलें उन्हें केंद्र सरकार में संभावित जिम्मेदारी से भी जोड़ रही हैं। इन चर्चाओं को उस मुलाकात से भी जोड़ा जा रहा है, जब 22 अगस्त को मनोज सिन्हा ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर किसी नई राजनीतिक या प्रशासनिक नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नियुक्ति आदेश में कार्यकाल का उल्लेख नहीं
मनोज सिन्हा के भविष्य को लेकर चर्चा की एक वजह उनका नियुक्ति आदेश भी बताया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति से संबंधित आदेश में कार्यकाल की कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं की गई थी। ऐसे में फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है। आधिकारिक फैसला सामने आने तक यह स्पष्ट नहीं है कि सिन्हा की मौजूदा जिम्मेदारी में कोई बदलाव होगा या नहीं।
2020 से संभाल रहे हैं जम्मू-कश्मीर
मनोज सिन्हा ने 7 अगस्त 2020 को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े कई प्रशासनिक और सुरक्षा मुद्दे प्रमुख रहे हैं। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ अभियान भी चलाया जा रहा है। हाल ही में सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इस अभियान और जम्मू-कश्मीर से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की थी। अब उनकी अनुपस्थिति में विनय कुमार सक्सेना को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था तो स्पष्ट हो गई है, लेकिन इसके साथ ही मनोज सिन्हा की अगली भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है।