आकृति चौधरी केस में योगी सरकार का बड़ा कदम, इलाहाबाद HC के 5 लाख मुआवजे के आदेश को SC में देगी चुनौती

आकृति चौधरी के खिलाफ कार्रवाई अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में की गई थी। पुलिस और प्रशासन की ओर से उन पर आंदोलन के दौरान माहौल बिगाड़ने और हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए थे।;

Update: 2026-09-09 10:05 GMT

नई दिल्ली: स्टूडेंट-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। हाई कोर्ट ने आकृति की हिरासत को रद्द करते हुए गौतमबुद्ध नगर की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया था, जिसकी भरपाई जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी से करने को कहा गया था। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जाएगी। अब इस मामले में शीर्ष अदालत के समक्ष राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी।

NSA की कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने उठाए थे सवाल

आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की और वह करीब पांच महीने तक हिरासत में रहीं। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचने पर अदालत ने NSA के तहत हिरासत के आधार और प्रशासन की ओर से पेश की गई सामग्री की समीक्षा की। कोर्ट को कार्रवाई के लिए पर्याप्त और ठोस आधार नहीं मिला। इसके बाद अदालत ने आकृति की हिरासत को रद्द कर दिया।

‘अटकलों पर आधारित’ बताए गए हिरासत के आधार

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर नाराजगी जताई थी। अदालत के अनुसार, आकृति को NSA के तहत हिरासत में रखने के लिए जिन आधारों का इस्तेमाल किया गया, वे पर्याप्त ठोस सामग्री से समर्थित नहीं थे। कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी अदालत की नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत का मानना था कि इस तरह की कार्रवाई को महज सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अधिकारियों की सैलरी से वसूली का आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने कहा था कि इस राशि की भरपाई उन अधिकारियों से की जाए, जिनकी भूमिका इस कार्रवाई में जिम्मेदार पाई गई। गौतमबुद्ध नगर की तत्कालीन डीएम मेधा रूपम समेत संबंधित अधिकारियों की सैलरी से मुआवजे की रकम वसूलने के निर्देश ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया। अब राज्य सरकार इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है।

मजदूर आंदोलन से जुड़ा है मामला

आकृति चौधरी के खिलाफ कार्रवाई अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में की गई थी। पुलिस और प्रशासन की ओर से उन पर आंदोलन के दौरान माहौल बिगाड़ने और हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर बाद में NSA के तहत हिरासत की कार्रवाई की गई। हालांकि, हाई कोर्ट ने हिरासत के लिए पेश सामग्री का परीक्षण करने के बाद प्रशासन के दावों को पर्याप्त नहीं माना और आकृति को हिरासत से राहत दी।

अब सुप्रीम कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई

राज्य सरकार की अपील के बाद अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा NSA की कार्रवाई रद्द करने और मुआवजा देने के आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं। फिलहाल सॉलिसिटर जनरल की ओर से अपील दाखिल किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया पर नजर है। इस केस में एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के इस्तेमाल के लिए जरूरी कानूनी मानकों का सवाल है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

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