स्मार्ट प्री-पेड मीटर से 98 प्रतिशत उपभोक्ता संतुष्टः रवीश गुप्ता
सोमवार को पीवीवीएनएल की ओर से उर्जा भवन के वीसी रूम में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया
पत्रकार वार्ता कर एमडी ने मीटर की तकनीकी जानकारियां साझा की
- पीवीवीएनएल में 81 लाख उपभोक्ता, अब तक 25 प्रतिशत मीटर बदले
मेरठ। सोमवार को पीवीवीएनएल की ओर से उर्जा भवन के वीसी रूम में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान एमडी रवीश गुप्ता ने पत्रकारों को स्मार्ट प्री-पेड मीटर को लेकर कई जानकारियां साझा की। उन्होंने बताया कि पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों में पुराने मीटर के स्थान पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। 81 लाख उपभोक्ताओं में से अभी तक 25 प्रतिशत स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके है। 75 प्रतिशत मीटरों को डिस्कॉम में जल्दी लगाया जाएगा।
रवीश गुप्ता ने कहा कि आने वाला समय अब प्रीपेड मीटरों का होगा। स्मार्ट मीटर में आ रही समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा उपभोक्ता अगर समय से अपने मीटर को रिचार्ज करता रहेगा तो उन्हें किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना होगा। प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर एक-एक यूनिट का हिसाब रखता है। आमतौर पर उपभोक्ताओं को हिसाब रखने में दिक्कत होती है लेकिन स्मार्ट मीटर में यह पूरी व्यवस्था पारदर्शी है। उपभोक्ता मीटर को रिचार्ज करते रहें और निर्बाध आपूर्ति का लाभ लेते रहें। उनको करना केवल इतना है कि अपने मीटर के बैलेंस को शून्य या नेगेटिव में नहीं जाने देना।
पूरा बकाया जमा करने पर ही मिली स्मार्ट प्री-पेड मीटर की सुविधा
प्रबंध निदेशक ने कहा कि अगर किसी स्मार्ट मीटर का बैलेंस तीन दिन तक नेगेटिव में जाता है तो ही वह डिस्कनेक्ट होगा। इस 3 दिन की अवधि में उपभोक्ता के पास डिपार्टमेंट के मैसेज जाते हैं। हॉलीडे वाले दिन डिस्कनेक्शन नहीं होता। पुराने बकाये पर 10 से 25 प्रतिशत जमा करने पर ही स्मार्ट मीटर का रिचार्ज स्वीकार हो जाता है। जबकि धरातल पर मामला इसके उलट देखने को मिल रहा हैं। मैसेज न आने की शिकायतों का तो सोशल मीडिया पर भरमार है ही वहीं काजीपुर बिजली घर पर एक उपभोक्ता को कुल बकाया 61 हजार जमा करने के बाद स्मार्ट प्री-पेड मीटर की सुविधा मिल सकी। जानकारी के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को इन परेशानियों से दो चार होना ही पड़ रहा है।
लाईफटाईम वारंटी के मीटर लगा रहा विभागः संजय जैन
एक सवाल के जवाब में डायरेक्टर कमर्शियल संजय जैन ने बताया कि मीटर की वारंटी लाईफ टाईम रहती है। उनका यह जवाब समझ से परे इसलिए है कि पश्चिमांचल में 81 लाख उपभोक्ता हैं और पिछले करीब 20 वर्षाे में दर्जनों तकनीक से लैस बिजली के मीटर बदले जाते रहे हैं। यदि बिजली के मीटर लाईफटाईम वारंटी के होते हैं तो उसे वारंटी की श्रेणी से बाहर कर दूसरे नए मीटर क्यों लगाए जाते हैं। क्या इन नए मीटर को लगाने का विभाग या उपभोक्ता को कोई खर्च नहीं देता होता। यदि विभाग या उपभोक्ता इन नए मीटरों का भुगतान कर रहे तो नई नई कंपनियों की तो चांदी ही चांदी होगी। इस मामले में उपभोक्ता परिषद लगातार आवाज उठा रहा है।