टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला : जगन मोहन रेड्डी
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने तेलंगाना पुलिस द्वारा टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बताया है।
हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने तेलंगाना पुलिस द्वारा टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बताया है।
जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर तेलुगु समाचार चैनल एनटीवी के पत्रकारों की गिरफ्तारी की आलोचना की। यह गिरफ्तारी तेलंगाना के एक मंत्री और एक महिला आईएएस अधिकारी के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री के प्रसारण से जुड़े मामले में की गई है।
उन्होंने लिखा, “मैं एनटीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। त्योहार के समय आधी रात को पत्रकारों के घरों के दरवाजे तोड़कर जबरन प्रवेश करना, बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और बिना नोटिस जारी किए गिरफ्तारी करना बेहद निंदनीय है और यह तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।”
जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि पत्रकार न तो अपराधी हैं और न ही आतंकवादी, फिर भी उनके साथ अत्यधिक कठोरता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पत्रकारों के परिवारों को गंभीर मानसिक आघात पहुंचता है और मीडिया जगत में भय का माहौल बनता है। उन्होंने गिरफ्तार पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए राज्य सरकार से संविधान का सम्मान करने, कानून के शासन को बनाए रखने और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आग्रह किया।
इस बीच, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स–इंडिया (एनयूजे-आई) ने भी तेलंगाना पुलिस द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों की “अवैध” गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और संवैधानिक स्वतंत्रता पर गंभीर हमला करार दिया है। संगठन ने गिरफ्तार पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की है।
एनयूजे-आई के अध्यक्ष रास बिहारी और वरिष्ठ नेता सिल्वेरी श्रीशैलम ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर एनटीवी पर प्रसारित एक खबर के सिलसिले में वरिष्ठ पत्रकार डोंटू रमेश, परिपूर्णा चारी और सुधीर की गिरफ्तारी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
पत्र में कहा गया है कि गिरफ्तारी का तरीका लोकतांत्रिक शासन की गंभीर विफलता को उजागर करता है। विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन के बावजूद, पत्रकारों को बिना किसी पूर्व नोटिस, समन या सफाई का अवसर दिए गिरफ्तार किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, विधि की उचित प्रक्रिया और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है।
एनयूजे-आई ने स्पष्ट किया कि वह कानून का उल्लंघन करने या व्यक्तिगत मानहानि करने वाली पत्रकारिता का समर्थन नहीं करता, लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर पत्रकारों को डराने का अधिकार नहीं है।
पत्र में यह भी कहा गया कि यदि सरकार को समाचार सामग्री पर आपत्ति थी तो उसके पास कई कानूनी विकल्प उपलब्ध थे, जैसे स्पष्टीकरण मांगना, नोटिस जारी करना या न्यायालय का रुख करना। गिरफ्तारी जैसा कठोर कदम उठाना तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है और यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रदत्त प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।