तेलंगाना निकाय चुनाव में कांग्रेस को भारी जीत, बीआरएस और भाजपा ने भी दर्ज कराई मौजूदगी; जानें AIMIM का हाल

11 फरवरी को 116 शहरी निकायों के 2,582 वार्डों के लिए मतदान हुआ था। मतगणना राज्यभर के 123 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच कराई गई। परिणामों में कांग्रेस ने 1,300 से अधिक वार्ड जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की, जबकि बीआरएस को लगभग 700 और भाजपा को करीब 275 वार्डों में सफलता मिली।

Update: 2026-02-14 05:46 GMT
हैदराबाद: तेलंगाना में हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को नया संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को इन चुनावों में उल्लेखनीय सफलता मिली है, जिससे राज्य में उसकी स्थिति और मजबूत हुई है। हालांकि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी कई क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए रखा। 11 फरवरी को 116 शहरी निकायों के 2,582 वार्डों के लिए मतदान हुआ था। मतगणना राज्यभर के 123 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच कराई गई। परिणामों में कांग्रेस ने 1,300 से अधिक वार्ड जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की, जबकि बीआरएस को लगभग 700 और भाजपा को करीब 275 वार्डों में सफलता मिली।

नगर निगमों में मिश्रित तस्वीर

सात नगर निगमों में हुए चुनावों के नतीजे भी दिलचस्प रहे। कांग्रेस ने तीन नगर निगमों में जीत दर्ज की और एक में बढ़त बनाए रखी। वहीं भाजपा ने करीमनगर और निजामाबाद नगर निगम में बहुमत हासिल कर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। कोथागुडेम नगर निगम में कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कई जगहों पर परिणाम त्रिशंकु रहे, जिससे निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। प्रमुख दल बहुमत से मामूली अंतर से पीछे रह गए हैं और अब वे निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन जुटाने की कोशिश में जुट गए हैं।

विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर मुहर

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने चुनावी जीत को राज्य सरकार की जनोन्मुखी नीतियों पर जनता की मुहर बताया। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में सरकार ने गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं, जिनका सकारात्मक असर जनता के बीच दिखा है। रेड्डी ने कहा, “हम सभी नगरपालिकाओं और नगर निगमों का समग्र विकास करेंगे। जनता ने जिस भरोसे के साथ हमें समर्थन दिया है, हम उस पर खरे उतरेंगे।”
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने दावा किया कि कांग्रेस ने 83 नगरपालिकाओं और पांच नगर निगमों में निर्णायक जीत दर्ज की है। उन्होंने इसे लगभग दो दशक बाद मिली ऐतिहासिक सफलता बताया और कहा कि राज्य में कांग्रेस की जड़ें फिर से मजबूत हुई हैं।

भाजपा की बढ़त: दो नगर निगमों में बहुमत

भाजपा ने भी इन चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने का दावा किया है। प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा कि पार्टी ने करीमनगर और निजामाबाद नगर निगम में बहुमत हासिल किया है। उनके अनुसार भाजपा छह नगरपालिकाओं में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और कई अन्य नगर निगमों में भी उसका प्रभाव बढ़ा है। रामचंद्र राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, बीआरएस और एआईएमआईएम के बीच अप्रत्यक्ष गठजोड़ देखने को मिला, जिसके बावजूद भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में भाजपा का यह प्रदर्शन पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब राज्य की सत्ता कांग्रेस के हाथ में है।

बीआरएस का पलटवार: ‘हम अब भी प्रमुख ताकत’

पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस ने भी चुनाव परिणामों को लेकर संतोष जताया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) ने कहा कि बीआरएस ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है और शहरी स्थानीय निकायों में प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने चुनाव के दौरान धनबल और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया। केटीआर ने कहा कि इसके बावजूद पार्टी ने लगभग 700 वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी मजबूत उपस्थिति साबित की है।

एआईएमआईएम की भूमिका

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) ने भी शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पार्टी ने चार नगर निगमों में 22 वार्ड और 15 नगरपालिकाओं में 40 से अधिक वार्डों में जीत हासिल की। विशेषज्ञों का मानना है कि हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में एआईएमआईएम की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है और वह शहरी राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है।

त्रिशंकु निकायों में बढ़ी हलचल

कई नगरपालिकाओं में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक बन गई है। कांग्रेस, बीआरएस और भाजपा तीनों दल इन निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में संभावित गठबंधनों और समर्थन के समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इन निकायों में सत्ता गठन की तस्वीर साफ होगी।

राज्य की राजनीति पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव परिणाम राज्य की मौजूदा राजनीतिक दिशा का संकेत देते हैं। कांग्रेस की जीत से रेवंत रेड्डी सरकार को प्रशासनिक और राजनीतिक मजबूती मिलेगी। वहीं भाजपा और बीआरएस का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि विपक्ष अभी भी प्रभावी बना हुआ है और भविष्य में मुकाबला कड़ा रह सकता है। तेलंगाना की शहरी राजनीति में बहुकोणीय मुकाबले ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में किसी एक दल का पूर्ण वर्चस्व नहीं है।

नतीजे कांग्रेस के लिए उत्साहवर्धक

तेलंगाना निकाय चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए उत्साहवर्धक रहे हैं, लेकिन भाजपा और बीआरएस ने भी अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखी है। कई निकायों में त्रिशंकु स्थिति ने आगे की राजनीति को और रोचक बना दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्दलीय पार्षद किस ओर रुख करते हैं और शहरी निकायों में सत्ता का संतुलन किस तरह बनता है। राज्य की राजनीति में यह चुनाव एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

Tags:    

Similar News