त्रिपुरा एनआरसी मामले में केंद्र और चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने त्रिपुरा में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अद्यतन किये जाने तथा अवैध तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों को प्रत्यर्पित करने संबंधी जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार एवं निर

Update: 2018-10-08 13:01 GMT

नयी दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने त्रिपुरा में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अद्यतन किये जाने तथा अवैध तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों को प्रत्यर्पित करने संबंधी जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार एवं निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने त्रिपुरा पीपल्स फ्रंट (टीपीएफ) की याचिका पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करके जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति गोगोई ने इस याचिका को असम के एनआरसी संबंधी मामले के साथ नत्थी करने का आदेश दिया। 

इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के एन चौधरी एवं वकील मनीष गोस्वामी ने दलील दी कि बंगलादेश की ओर से अवैध घूसपैठ की समस्या असम की तुलना में त्रिपुरा में अधिक है। 

उन्होंने दलील दी कि त्रिपुरा के लिए एनआरसी 1951 में तैयार की गयी थी और अब एक बार फिर इसे अद्यतन करने की आवश्यकता आन पड़ी है। इससे अवैध रूप से रह रहे बंगलादेशी नागरिकों की पहचान हो सकेगी एवं उन्हें प्रत्यर्पित करने का रास्ता साफ होगा।

अवैध प्रवासी बंगलादेशियों के कारण त्रिपुरा की सामाजिक-आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक एवं सामाजिक-राजनीतिक संतुलन बिगड़ रहा है और इसे ठीक किया जाना जरूरी है। उनकी दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया।

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