रोज नियमित पढ़ाई कर छात्र सफलता प्राप्त कर सकते हैं
12वीं कक्षा की परीक्षा में प्रदेश में टॉप स्थान बनाने वाले शिव बताते हैं कि मै पढ़ाई में विशेष ध्यान देता हूँ
सिमगा। 12वीं कक्षा की परीक्षा में प्रदेश में टॉप स्थान बनाने वाले शिव बताते हैं कि मै पढ़ाई में विशेष ध्यान देता हूँ । दिन में 4 घण्टे पढ़ना । खेलना मुझे पसंद हैं। छात्रों को परीक्षा से घबराना नहीँ चाहिए । स्कूल में पढ़ाये गए विषयोँ को घर में जरूर दुहराना चाहिए । शिव पांडेय ने बताया की बाजार में मिलने वाली गाइड जैसे पुस्तको को मैने नहीं पढ़ा हैं ।
ना ही परीक्षा के समय खेलना बन्द किया हुँ । रोज नियमित पढ़ाई कर छात्र सफलता प्राप्त कर सकते हैं । शिव पांडेय ने बताया कि स्कूल में मेरे दोस्त कम हैं । मुझे ज्यादा लोगों से मिलना जुलना पसन्द नहीं हैं । स्कूल में छात्र मुझसे दूर रहते थे । मै जानता था । जिस दिन कामयाबी हासिल होगा । लोग मुझसे मिलने बात करने आएंगे । क्रिकेटर बनने की बात पर शिव ने कहा कि मै आगे पढ़ाई करने के साथ क्रिकेट भी खेलना चाहता हुँ । उसने बताया कि मुझे पापा ने कक्षा 9वीं में बल्ला लाकर दिया था । मैं महेंद्र सिंह धोनी की तरह बनना चाहता हुँ । उनका बेटिंग करने का स्टाइल मुझे बहुत पसंद हैं ।
पिता मनकामना पांडेय ने बताया कि शिव को गिफ्ट देने के लिए मैने किस्त में बल्ला 10 हजार का लिया था । बच्चों को पढ़ाई व खेल में कभी कमी नहीँ आने दिया । पेशे से फोटोग्राफर मनकामना पांडेय मूलत: मध्यप्रदेश रींवा के निवासी हैं । किराये के मकान में रहकर बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ना बहुत मुश्किल कार्य हैं । शिव ने आगे कहा कि अक्सर स्कुलो में कमजोर छात्रों और मेधावी छात्रों में थोड़ा बहुत अंतर शिक्षक करते हैं । यह स्वभाविक हैं ।
सफलता के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ता हैं । मध्यमवर्गीय परिवार के छात्र भी अपनी लगन से ईमानदारी के साथ पढ़कर टॉपर बन सकते हैं । परीक्षा के समय गाइड कोचिंग के चक्कर मे पढ़कर लक्ष्य नहीं प्राप्त किया जा सकता हैं । ऊँचे महगें निजी स्कूलों के ही छात्र टॉपर बनते हैं यह सच नहीं हैं । मेहनत से की गई पढ़ाई रंग लाती हैं । सुविधाहीन स्कुलो में भी प्रतिभाओ की कमी नहीं हैं ।
नगर में खेल सुविधाओ के बारे में पूछने पर शिव ने कहा कि खेल मैदान का अभाव है । प्रशासन खिलाड़ियों को खेल के लिए सर्वसुविधा युक्त मैदान व खेल साम्रगी उपलब्ध कराए । शिव पांडेय ने कहा कि अपनी पहचान बनाने कड़ी मेहनत करिए लोग खुदबखुद आपको जानने लगेंगे । रात को नगर का गौरव पथ सुना होता था । तब शिव अपने छोटे भाई के साथ बल्ला लेकर सड़क में खेलता हैं । प्रतिभा सुविधाओ की मोहताज नहीं होता ।