जिज्ञासु एवं आकांक्षी प्रवृत्ति का विद्यार्थी ही लक्ष्य को हासिल करता है-पटनायक

  महासमुंद जिले की अग्रणी प्रेरक शाला शासकीय उच्च  प्राथमिक शाला कसहीबाहरा  में नवीन शैक्षणिक सत्र 2019 -20  में संचालित होने जा रही  संडे की पाठशाला का शुभारंभ

Update: 2019-07-23 16:22 GMT

पिथौरा।  महासमुंद जिले की अग्रणी प्रेरक शाला शासकीय उच्च  प्राथमिक शाला कसहीबाहरा  में नवीन शैक्षणिक सत्र 2019 -20  में संचालित होने जा रही  संडे की पाठशाला का शुभारंभ किया गया।

आज प्रथम दिवस पर रंग भरो प्रतियोगिता में 5  छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया ।पुरस्कृत विद्यार्थियों के नाम इस प्रकार है- पहला  कंचन दीवान(8वीं) दूसरा नेहा ध्रुव (8वीं) तीसरा मीनाक्षी दीवान (6वीं)चौथा पुरुषोत्तम (7वीं) पांचवा वीरू (7वीं) कक्षा 11वीं के छात्र नीलकमल को दीवार पत्रिका संकल्प हेतु सुंदर चित्रांकन  के लिए प्रमाण पत्र व गिफ्ट  प्रदान किया गया। छात्रों की रचनात्मक एवं सकारात्मक सोच में वृद्धि के लिए सह संज्ञानात्मक गतिविधियों पर अधारित  यह मनोरंजक शाला जून 2014 से निरंतर रूप से संचालित हो रही है।

संस्था प्रभारी एवं कार्यक्रम संयोजक हेमन्त खुटे ने कहा कि आज ग्रामीण परिवेश में समग्र शिक्षा विकास एवं विद्यार्थियों में कला के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने के लिए एक सामूहिक प्रयास है जिसे सामाजिक सहभागिता के बल पर  शून्य निवेश पर निरंतर संचालित कर पा रहे है तथा लोगों की इसी सदभावना के चलते आज हम छठे वर्ष पर प्रवेश करने जा रहे है । इस पाठशाला में आंगनबाड़ी से लेकर हाई स्कूल के बच्चे सम्मिलित होकर विभिन्न गतिविधियों में कुशल हो रहे हैं ।

आज प्रथम दिवस पर रंग भरो प्रतियोगिता का आयोजन  तथा  दीवार संकल्प  (पाक्षिक) का विमोचन किया गया।  इस दीवार पत्रिका का प्रकाशन तत्कालीन बीआरसी एवं वर्तमान ए पी सी देवनारायण जांगड़े महासमुन्द के मार्गदर्शन एवं सलाह में   भित्ति पत्रिका के  प्रथम मुखपृष्ठ का अनावरण  वर्ष 2010 में   उन्हीं के करकमलों से किया गया था जो आज बच्चों के लिए  हुनर को प्रदर्शित करने का जरिया बन गया है।

एनपी स्मृति फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक बीजू पटनायक ने संडे की पाठशाला को अभिप्रेरित  करते हुए कहा कि जिज्ञासु एवं आकांक्षी प्रवृत्ति का  विद्यार्थी  ही अपने लक्ष्य को हासिल करता है।
 

समग्र शिक्षा विकास के लिए शारीरिक ,मानसिक, आर्थिक एवं खेल विकास के लिए संडे की पाठशाला मददगार साबित हो रही है।

ग्रामीण अंचल में संसाधन के अभाव के बावजूद बच्चे लगन एवं उत्साह पूर्वक इस पाठशाला में शामिल होकर अपने भविष्य को गढ़ रहे हैं।इस पाठशाला के सूत्रधार हेमन्त खुटे  का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं ।
 

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