कोलंबो: भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले एक नया सवाल चर्चा के केंद्र में है- क्या मैच से पहले दोनों टीमों के कप्तान और खिलाड़ी पारंपरिक तरीके से हाथ मिलाएंगे या नहीं? क्रिकेट जगत और प्रशंसकों के बीच इस मुद्दे पर संशय बना हुआ है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव और हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि में खिलाड़ियों के व्यवहार पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में यह सवाल केवल औपचारिकता का नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक महत्व का भी बन गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदलते बयान
शनिवार को कोलंबो में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा से हाथ मिलाने की परंपरा को लेकर सवाल पूछा गया। शुरुआत में उन्होंने खेल भावना पर जोर दिया। आगा ने कहा, “खेल उसी भावना से खेला जाना चाहिए जिसके लिए वह जाना जाता है। क्रिकेट सही भावना के साथ खेला जाना चाहिए। मेरी व्यक्तिगत राय शायद मायने नहीं रखती, लेकिन क्रिकेट उसी तरीके से खेला जाना चाहिए जैसा इसे हमेशा खेला जाता रहा है।” हालांकि जब एक भारतीय पत्रकार ने सीधे तौर पर पूछा कि क्या वह भारतीय कप्तान से हाथ मिलाएंगे, तो आगा ने जवाब को टालते हुए कहा, “रविवार को पता चलेगा कि क्या होता है।” उनके इस बदले हुए रुख ने अटकलों को और हवा दे दी है।
सूर्यकुमार यादव का हल्का-फुल्का जवाब
उधर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव से भी यही सवाल पूछा गया। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “24 घंटे रुक जाओ न, अच्छे से खाना खाओ, सो जाओ न। रविवार को मैच से पहले इस पर फैसला ले लेंगे। कल ब्रेक कर दूंगा सस्पेंस। टॉस का टॉस में देखेंगे।” सूर्यकुमार का यह जवाब भले ही हल्के अंदाज में था, लेकिन इससे स्पष्ट है कि अंतिम निर्णय अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। भारतीय टीम सूत्रों के मुताबिक यह फैसला उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार लिया जाएगा।
दुबई से शुरू हुआ बदलाव
भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच हाथ मिलाने की परंपरा पिछले साल दुबई में आयोजित एशिया कप के दौरान टूट गई थी। तब से दोनों टीमों ने मैदान पर औपचारिक अभिवादन से परहेज किया है। उस टूर्नामेंट की पृष्ठभूमि में पहलगाम हमला और उसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था। इन घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को और संवेदनशील बना दिया था। इसी के बाद से क्रिकेट मैदान पर भी दूरी दिखाई देने लगी।
भावनात्मक माहौल और सोशल मीडिया की सतर्कता
भारतीय टीम के भीतर इस बात को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है कि सोशल मीडिया पर सार्वजनिक भावनाएं अभी भी संवेदनशील हैं। पहलगाम हमले के बाद देश में भावनाएं तीखी रही हैं और किसी भी प्रतीकात्मक कदम पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। टीम प्रबंधन इस पहलू को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय लेने से पहले व्यापक परिप्रेक्ष्य को देख रहा है।
आईसीसी की भूमिका और कूटनीतिक संकेत
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) इस मैच को सामान्य खेल भावना के साथ संपन्न कराने के पक्ष में है। आईसीसी प्रमुख जय शाह रविवार को कोलंबो में मौजूद रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, आईसीसी चाहता है कि एशिया के पांच टेस्ट खेलने वाले देशों के शीर्ष अधिकारी एक साथ बैठकर मैच देखें। इससे एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि क्रिकेट संवाद का मंच बना रह सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल भी कोलंबो में मौजूद रहेंगे। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश बोर्ड बीसीसीआई के साथ अपने संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रयासरत है।
परंपरा बनाम परिस्थितियां
क्रिकेट में मैच से पहले और बाद में हाथ मिलाना खेल भावना का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है और प्रतिस्पर्धा के बावजूद सम्मान का संदेश देती है। हालांकि जब खेल का मंच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाओं की पृष्ठभूमि में आ जाता है, तो प्रतीकात्मक इशारे भी संवेदनशील बन जाते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले हमेशा से भावनात्मक रहे हैं। ऐसे में कप्तानों का एक साधारण सा इशारा भी व्यापक संदेश दे सकता है- चाहे वह सकारात्मक हो या विवादास्पद।
खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव
इस मुद्दे ने खिलाड़ियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव भी डाल दिया है। एक ओर उन्हें मैदान पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है, दूसरी ओर उनके हर कदम को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में टीमों को खेल पर ध्यान केंद्रित रखना ही बेहतर रणनीति होती है। किसी भी प्रकार की अनावश्यक बहस प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
संभावित परिदृश्य
रविवार को टॉस के समय स्थिति स्पष्ट हो सकती है। तीन संभावनाएं सामने हैं:
१. दोनों कप्तान पारंपरिक तरीके से हाथ मिलाएं, जिससे खेल भावना का संदेश जाए।
२. केवल औपचारिक अभिवादन हो, लेकिन पारंपरिक हैंडशेक से परहेज किया जाए।
३. पूरी तरह दूरी बनाए रखी जाए, जैसा पिछले मुकाबलों में देखा गया।
जो भी निर्णय होगा, वह केवल टीमों का नहीं बल्कि व्यापक संदर्भों का प्रतिबिंब माना जाएगा।
क्रिकेट से बड़ा संदेश?
भारत-पाक मुकाबले अक्सर केवल खेल नहीं होते। वे कूटनीतिक संकेतों और जनभावनाओं के बीच संतुलन की परीक्षा भी बन जाते हैं। यदि कप्तान हाथ मिलाते हैं तो इसे खेल भावना की जीत के रूप में देखा जा सकता है। वहीं यदि ऐसा नहीं होता तो इसे मौजूदा परिस्थितियों का स्वाभाविक परिणाम माना जाएगा। आईसीसी और अन्य बोर्ड अधिकारी इस मैच को सकारात्मक वातावरण में संपन्न कराने के इच्छुक हैं।
सस्पेंस बरकरार
फिलहाल स्थिति अनिश्चित है। सलमान आगा के बदले हुए बयान और सूर्यकुमार यादव के रहस्यमय जवाब ने रोमांच को और बढ़ा दिया है। रविवार को टॉस के समय न केवल मैच की शुरुआत होगी, बल्कि इस प्रतीकात्मक सवाल का भी जवाब मिल जाएगा। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें मैदान पर होंगी, लेकिन उससे पहले कप्तानों के व्यवहार पर भी उतनी ही गहरी नजर रहेगी। क्या खेल भावना राजनीति से ऊपर उठेगी, या परिस्थितियां परंपरा पर भारी पड़ेंगी—इसका फैसला कुछ ही घंटों में हो जाएगा।