नीतीश कुमार रेड्डी पर उठे सवाल: बल्ले और गेंद से प्रभावित नहीं कर सके, आंकड़े दे रहे गवाही

नीतीश कुमार रेड्डी को अब तक तीन वनडे मैच खेलने का मौका मिला है, लेकिन इन तीनों मैचों में उनका योगदान बेहद सीमित रहा है। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने कुल 7.1 ओवर फेंके हैं और एक भी विकेट हासिल नहीं कर पाए हैं।

Update: 2026-01-16 04:31 GMT
नई दिल्‍ली। राजकोट में खेले गए दूसरे वनडे में भारत को मिली हार के बाद टीम चयन और संयोजन को लेकर बहस तेज हो गई है। खास तौर पर ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को वाशिंगटन सुंदर की जगह टीम में शामिल किए जाने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। वजह साफ है मौके मिलने के बावजूद नीतीश अब तक न तो बल्ले से और न ही गेंद से टीम के लिए निर्णायक योगदान दे पाए हैं। उनके प्रदर्शन के आंकड़े और टीम प्रबंधन के फैसले इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि वह फिलहाल टीम की कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं।

मौके मिले, लेकिन असर नहीं
नीतीश कुमार रेड्डी को अब तक तीन वनडे मैच खेलने का मौका मिला है, लेकिन इन तीनों मैचों में उनका योगदान बेहद सीमित रहा है। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने कुल 7.1 ओवर फेंके हैं और एक भी विकेट हासिल नहीं कर पाए हैं। यह आंकड़ा अपने आप में सवाल खड़ा करता है कि उन्हें ऑलराउंडर के रूप में खिलाया जा रहा है, लेकिन गेंदबाजी लगभग नाममात्र ही कराई जा रही है। बल्लेबाजी में भी हालात कुछ खास बेहतर नहीं हैं। तीन मैचों में नीतीश ने कुल मिलाकर केवल 47 रन बनाए हैं। ये रन न तो मैच का रुख बदलने वाले रहे और न ही टीम को किसी मुश्किल परिस्थिति से निकालने वाले।

न्यूजीलैंड के खिलाफ गंवाया अहम मौका
दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड के खिलाफ नीतीश के पास खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर था। जब वह बल्लेबाजी के लिए उतरे, तब करीब 15 ओवर शेष थे। विकेट पर टिककर खेलने और पारी को संभालने का यह बेहतरीन मौका माना जा रहा था। ऐसे हालात में एक ऑलराउंडर से अपेक्षा होती है कि वह या तो रन गति को संभाले या टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद करे। लेकिन नीतीश इस मौके का फायदा नहीं उठा सके। वह सिर्फ 20 रन बनाकर आउट हो गए और गेंदबाजी में भी अपने दो ओवर में कोई विकेट नहीं ले पाए। यही वजह है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर उनकी जगह किसी विशुद्ध बल्लेबाज या विशुद्ध गेंदबाज को मौका दिया जाता, तो शायद टीम को ज्यादा फायदा मिल सकता था।

सहायक कोच का बयान
नीतीश के प्रदर्शन को लेकर टीम प्रबंधन के भीतर भी असंतोष के संकेत मिलने लगे हैं। भारतीय टीम के सहायक कोच रेयान टेन डोएशे ने इस पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्वीकार किया कि मौके दिए जाने के बावजूद नीतीश अधिकतर मैचों में कुछ खास नहीं कर पाए हैं। डोएशे ने कहा, “नीतीश के साथ हम लगातार इस बात पर चर्चा करते हैं कि उन्हें कैसे तैयार किया जाए और कब मैच खिलाए जाएं। लेकिन जब आप किसी खिलाड़ी को मौके देते हैं और वह बार-बार मैच में प्रभाव नहीं छोड़ पाता, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।” उन्होंने साफ संकेत दिया कि दूसरे वनडे में मिला मौका नीतीश के लिए बेहद अहम था, लेकिन वह उसे भुना नहीं सके।

टीम में जगह बनाने के लिए ऐसे मौके जरूरी
रेयान टेन डोएशे ने आगे कहा कि जो खिलाड़ी टीम में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश कर रहा हो, उसके लिए ऐसे मौके बेहद अहम होते हैं। डोएशे ने कहा, जब आपको विकेट पर 15 ओवर बिताने का मौका मिलता है, तो यह शानदार अवसर होता है। ऐसे मौकों पर बल्ले से योगदान देकर आपको चयन की अपनी दावेदारी मजबूत करनी होती है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिके रहने के लिए खिलाड़ियों को ऐसे ही मौकों में खुद को साबित करना पड़ता है, खासकर तब जब टीम संयोजन पहले से ही संतुलन तलाश रहा हो।

तीसरे स्पिनर का विकल्प ज्यादा बेहतर?
डोएशे ने टीम संयोजन को लेकर एक अहम संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए भारत शायद नीतीश की जगह तीसरे स्पिनर को खिलाना ज्यादा पसंद करता। खास तौर पर इसलिए क्योंकि न्यूजीलैंड के स्पिनरों ने भारतीय परिस्थितियों का बेहद अच्छी तरह से फायदा उठाया। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि टीम प्रबंधन खुद भी इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ऑलराउंडर के नाम पर ऐसे खिलाड़ी को खिलाना सही है, जो न तो गेंद से विकेट दिला रहा है और न ही बल्ले से रन बना रहा है।

टी20 विश्व कप अभी दूर, फोकस वनडे पर
नीतीश के चयन और प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों के बीच रेयान टेन डोएशे ने यह भी साफ किया कि टीम का ध्यान फिलहाल अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप पर नहीं है। उनके मुताबिक विश्व कप अभी “काफी दूर” है और टीम की प्राथमिकता इस समय न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही वनडे सीरीज है। हार के कारणों पर बात करते हुए डोएशे ने कहा कि रणनीति के लिहाज से ऐसा कुछ नहीं था, जिसे टी20 विश्व कप की तैयारी के चलते नजरअंदाज किया गया हो। उन्होंने कहा “हम पूरी तरह से इस सीरीज पर फोकस कर रहे हैं। हर सीरीज महत्वपूर्ण होती है और इन खिलाड़ियों के लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत कुछ दांव पर लगा होता है,”।

सीरीज से सीख और आगे की राह
डोएशे के मुताबिक यह सीरीज बेहतर प्रदर्शन करने और अच्छी आदतें विकसित करने का मौका है। टीम प्रबंधन फिलहाल विश्व कप की चर्चा को कुछ समय के लिए पीछे रखकर मौजूदा सीरीज से अधिकतम सीख निकालना चाहता है। हालांकि, नीतीश कुमार रेड्डी के मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले मैचों में टीम संयोजन में बदलाव हो सकते हैं। अगर वह जल्द ही बल्ले या गेंद से असर नहीं दिखा पाए, तो टीम प्रबंधन के पास उन्हें बाहर बैठाने या विकल्प तलाशने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचेंगे। राजकोट की हार के बाद अब नजरें अगले मुकाबले पर होंगी, जहां चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के फैसले यह तय करेंगे कि भरोसा बनाए रखा जाए या बदलाव का रास्ता अपनाया जाए।

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