नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) खिलाड़ियों के केंद्रीय अनुबंधों को और सरल तथा वर्तमान क्रिकेट परिदृश्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। बोर्ड 2018 में शुरू की गई ‘ए प्लस’ श्रेणी को समाप्त करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, 2025-26 सत्र के लिए घोषित होने वाले नए केंद्रीय अनुबंधों में खिलाड़ियों को अब केवल ए, बी, सी और डी चार श्रेणियों में ही बांटा जाएगा। यह फैसला ऐसे समय लिया जा रहा है, जब भारतीय क्रिकेट में प्रारूप-आधारित विशेषज्ञ खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है और बहुत कम खिलाड़ी ऐसे रह गए हैं, जो तीनों प्रारूपों टेस्ट, वनडे और टी-20 में नियमित रूप से खेलते हैं।
मौजूदा अनुबंध व्यवस्था क्या कहती है
फिलहाल बीसीसीआई की केंद्रीय अनुबंध नीति के तहत चार नहीं, बल्कि पांच श्रेणियां हैं। इसमें सबसे ऊपर ए प्लस श्रेणी आती है, जिसमें शामिल खिलाड़ियों को सालाना सात करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इसके बाद ए श्रेणी के खिलाड़ियों को पांच करोड़, बी श्रेणी को तीन करोड़ और सी श्रेणी के खिलाड़ियों को एक करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। ए प्लस श्रेणी 2018 में इस उद्देश्य से शुरू की गई थी कि तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष खिलाड़ियों को अतिरिक्त सम्मान और प्रोत्साहन दिया जा सके।
क्यों खत्म हो रही है ए प्लस श्रेणी
बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा समय में तीनों प्रारूपों में लगातार खेलने वाले खिलाड़ी बहुत कम रह गए हैं। पिछले अनुबंध चक्र में केवल चार खिलाड़ियों रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा को ए प्लस श्रेणी में रखा गया था। इनमें से अब सिर्फ जसप्रीत बुमराह ही तीनों प्रारूपों में सक्रिय खिलाड़ी हैं। विराट कोहली और रोहित शर्मा केवल वनडे क्रिकेट खेलते हैं, जबकि रविंद्र जडेजा टेस्ट और वनडे टीम का हिस्सा हैं। तीनों ही टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। ऐसे में बीसीसीआई का मानना है कि ए प्लस जैसी अलग श्रेणी बनाए रखना व्यावहारिक नहीं रह गया है और इससे अनुबंध प्रणाली अनावश्यक रूप से जटिल हो जाती है।
नया ढांचा: चार श्रेणियां
सूत्रों के अनुसार, 2025-26 के लिए प्रस्तावित नए अनुबंध ढांचे में खिलाड़ियों को ए, बी, सी और डी चार श्रेणियों में रखा जाएगा। हालांकि अंतिम वेतन संरचना पर आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन संकेत हैं कि ए श्रेणी के खिलाड़ियों को सात करोड़ रुपये का भुगतान किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि शीर्ष श्रेणी का आर्थिक लाभ बना रहेगा, लेकिन उसे ए प्लस की बजाय ए श्रेणी में समाहित कर दिया जाएगा।
बुमराह को नहीं होगा नुकसान
बीसीसीआई सूत्रों ने साफ किया है कि इस बदलाव से जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। बुमराह को भारतीय क्रिकेट का सबसे अहम ऑल-फॉर्मेट खिलाड़ी माना जाता है और नए ढांचे में भी उन्हें शीर्ष श्रेणी में ही रखा जाएगा। वहीं युवा बल्लेबाज शुभमन गिल के ए श्रेणी में शामिल होने की पूरी संभावना है। हाल के वर्षों में गिल ने तीनों प्रारूपों में निरंतर प्रदर्शन किया है और वह भविष्य की भारतीय टीम का अहम स्तंभ माने जा रहे हैं।
रोहित-कोहली का संभावित वर्गीकरण
सूत्रों का कहना है कि रोहित शर्मा और विराट कोहली को नए अनुबंध ढांचे में बी श्रेणी में रखा जा सकता है। दोनों दिग्गज फिलहाल केवल वनडे प्रारूप में सक्रिय हैं और चयनकर्ता इसी आधार पर श्रेणियों का निर्धारण कर रहे हैं। हालांकि, बीसीसीआई के भीतर यह भी चर्चा है कि खिलाड़ियों की अनुभव, उपलब्धियों और ब्रांड वैल्यू को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला संतुलित तरीके से लिया जाएगा।
चयनकर्ताओं ने भेजी रूपरेखा
बीसीसीआई के चयनकर्ताओं ने केंद्रीय अनुबंधों की प्रस्तावित रूपरेखा बोर्ड को सौंप दी है। इसमें खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन, फिटनेस, उपलब्धता और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए श्रेणियों का सुझाव दिया गया है। अब इस मसौदे पर बीसीसीआई के पदाधिकारी और शीर्ष अधिकारी अंतिम निर्णय लेंगे। माना जा रहा है कि आगामी एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस पर औपचारिक मुहर लग सकती है।
एपेक्स काउंसिल की भूमिका
केंद्रीय अनुबंधों से जुड़ा कोई भी बड़ा बदलाव बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल की मंजूरी के बाद ही लागू होता है। अगली बैठक में न सिर्फ नई श्रेणियों पर चर्चा होगी, बल्कि यह भी तय किया जाएगा कि वेतन संरचना में कोई और संशोधन किया जाए या नहीं।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि ए प्लस श्रेणी को खत्म करना भारतीय क्रिकेट की बदलती वास्तविकता को दर्शाता है। जहां पहले तीनों प्रारूपों में खेलने वाले खिलाड़ी आम थे, वहीं अब वर्कलोड मैनेजमेंट और प्रारूप विशेषज्ञता के दौर में अनुबंध प्रणाली को भी उसी के अनुरूप ढालना जरूरी हो गया है। बीसीसीआई का यह कदम न सिर्फ अनुबंध व्यवस्था को सरल बनाएगा, बल्कि युवा और उभरते खिलाड़ियों के लिए भी स्पष्ट रास्ता तय करेगा। अब सभी की निगाहें एपेक्स काउंसिल की बैठक और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो भारतीय क्रिकेट के केंद्रीय अनुबंधों की नई तस्वीर पेश करेगी।