किराये की कोख का कारोबार, एजेंट सहित 5 गिरफ्तार
नि:संतान दंपत्ति को संतान का सुख देने के लिए वरदान मानी जाने वाली सेरोगेसी का व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने का भण्डाफोड़ कोतवाली पुलिस ने किया है......
राजधानी में जारी व्यवसाय का कोरबा में भण्डाफोड़
कोरबा। नि:संतान दंपत्ति को संतान का सुख देने के लिए वरदान मानी जाने वाली सेरोगेसी का व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने का भण्डाफोड़ कोतवाली पुलिस ने किया है। राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में महिला एजेंट के जरिये चल रहे इस व्यवसाय में शामिल कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल दाखिल कराया गया है।
\जानकारी के अनुसार 13 जून को कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक विवेक शर्मा को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सीतामणी निवासी पूजा सारथी पति हीरालाल सारथी एक छोटी सी बच्ची को रखी हुई है और रायपुर से उसके यहां आकर एक महिला बच्ची की खरीदी-बिक्री की बात कर रही है। सूचना पर टीआई ने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया व उनके मार्गदर्शन में पुलिस की टीम सीतामणी पहुंची। यहां पूजा की गोद में करीब 25 दिन की मासूम बच्ची मिली और ऊपर से पूजा के 4 माह की गर्भवती होने का भी पता चला। इस चौंकाने वाली जानकारी की तह तक जाने पर सेरोगेसी (किराये की कोख) के व्यवसाय का खुलासा हुआ। पूरे मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक डी श्रवण, सीएसपी कोरबा एसएस पैकरा व सीएसपी दर्री सुखनंदन राठौर ने संयुक्त रूप से देते हुए बताया कि प्रकरण में पूजा सारथी, उसके पति हीरालाल सारथी, सेरोगेसी कराने वाली एजेंट रेणु ठाकुर निवासी आजाद चौक हंडीपारा रायपुर, मध्यस्थता करने वाली कोमल सेंदे्र व मासूम बच्ची की मां दुर्गा के विरूद्ध धारा 41(1-4), 379, 411 भादवि के तहत जुर्म दर्ज कर सभी को न्यायालय में पेश कर जेल दाखिल कराया गया है।
1.50 लाख में होता था किराये की कोख का सौदा
बताया गया कि सेरोगेट मदर पूजा सारथी 1 साल से रायपुर में रामनगर कर्मा चौक में किराये के मकान में रहकर एक नर्सिंग होम में झाडू, साफ-सफाई कार्य करती थी। रामनगर ही रहने वाली कोमल सेंद्रे ने 15 दिन की बच्ची को पूजा सारथी के पास एक हफ्ते देखभाल के लिए रखवाया और इसके एवज में 5 हजार रूपये देने की बात हुई। पूजा उस बच्ची को कुछ दिन अपने साथ रखा फिर ज्यादा पैसे के लालच में लेकर कोरबा आ गई। इधर उस बच्ची को लेने कोमल जब पूजा के पास पहुंची तो वह घर से गायब मिली। चूंकि पूजा ने सेरोगेट मदर होने के कारण मां लक्ष्मी नर्सिंग होम में आवश्यक दस्तावेज के साथ अपना आधार कार्ड जमा किया था जिसमें दर्ज पता के आधार पर कोमल उसकी तलाश करते सीतामणी पहुंची। यहां बच्ची को ले जाने की बात पर विवाद हुआ। इसकी सूचना पर पहुंची पुलिस को पूछताछ में कोमल ने बताया कि उक्त बच्ची दुर्गा ऊर्फ ममता की है जो अपनी आर्थिक परेशानियों के चलते इसे बेचना चाहती थी। दुर्गा ने इसके लिए मां लक्ष्मी नर्सिंग होम शंकर नगर में काम करने वाली रेणु ठाकुर से बात की थी और उसने ग्राहक मिलनेे तक बच्चे को कोमल को रखने दिया था। कोमल ने यह बच्ची पूजा को दे दी थी। ग्राहक मिलने पर रेणु ने बच्चा मंगाया तो पूजा नहीं मिली। कोमल ने बताया कि पूजा को सेरोगेट तरीके से गर्भवती किया गया है और इसका रेगुलर चेकअप अस्पताल में होता रहता है। कोमल ने बताया कि वह सेरोगेसी कराने के लिए महिलाओं को लाने एजेंट का कार्य करती है। मुख्य एजेंट रेणु है जो सेरोगेसी के लिए महिला लाने पर नर्सिंग होम से प्रति महिला 10 हजार रूपये प्राप्त करती है।
रेणु खुद सेरोगेसी के जरिये 5 शिशु बेच चुकी है और कोमल खुद भी एक सेरोगेसी करा चुकी है और एक सेरोगेसी के लिए उसे 1 लाख 50 हजार रूपये मिलते थे।
मासूम को मिला मातृ छाया का सहारा एसपी ने बताया कि अवैधानिक तरीके से बिकने से बचाई गई मासूम बच्ची को बाल कल्याण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर मातृछाया संस्था बिलासपुर में देखभाल के लिए भर्ती करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर के मां लक्ष्मी नर्सिंग होम में जिस तरह से सेरोगेसी के प्रकरण लाये जा रहे थे, उसके संबंध में आवश्यक छानबीन की जा रही है और तरह के कितने केस वहां डील किये गये यह भी पता लगाया जा रहा है।
भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो सेरोगेसी को व्यावसायिक अनुमति देता हो। महिला अनुमति लेकर सेरोगेट मदर बन सकती है पर बच्चे को बेच नहीं सकती। जांच में और भी जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी। सेरोगेसी कराने में शासन के नियमों के तहत वैधानिक तरीके से कार्य किया जा रहा है या नहीं इसके लिए संबंधित नर्सिंग होम से कागजात प्राप्त कर जांच की जाएगी। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को भी पत्र लिखकर जानकारी ली जा रही है। नियमत: सेरोगेसी प्रेगनेंसी के मामले में अस्पताल को 25 साल तक का रिकार्ड रखना पड़ता है।