जयपुर: जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और कथित खुलासों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। इसी बीच भारत में भी इस मुद्दे ने सियासी रंग ले लिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और उनके पुत्र सवाई पद्मनाभ सिंह का नाम एपस्टीन फाइल्स से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। भाजपा ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और तथ्यहीन बताया है। राजस्थान विधानसभा में 11 फरवरी को बजट 2026 पेश होना है। उससे पहले खेड़ा के बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
पवन खेड़ा का आरोप क्या है?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि 14 मई 2018 को एक अज्ञात प्रेषक ने जेफ्री एपस्टीन को ईमेल भेजा था, जिसमें लिखा गया था कि रोम के पास स्थित पारिवारिक किले में “जयपुर के महाराजा” का जन्मदिन समारोह आयोजित किया जा रहा है। खेड़ा ने इस संदर्भ को सवाई पद्मनाभ सिंह से जोड़ते हुए कहा कि 2018 में रोम में उनका 20वां जन्मदिन समारोह सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस आयोजन का संबंध एपस्टीन या उसके सहयोगियों से था। खेड़ा ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब दीया कुमारी बजट पेश करेंगी, तो उन्हें उस जन्मदिन समारोह के खर्च और कथित आयोजकों पर भी स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एपस्टीन फाइल्स में सामने आ रही जानकारियां “आइसबर्ग का सिर्फ ऊपरी हिस्सा” हैं और भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
दीया कुमारी और सवाई पद्मनाभ सिंह
दीया कुमारी जयपुर राजघराने से ताल्लुक रखती हैं और वर्तमान में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री हैं। उनके पुत्र सवाई पद्मनाभ सिंह जयपुर के शाही परिवार के उत्तराधिकारी माने जाते हैं। वे पोलो खिलाड़ी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय शख्सियत हैं। 2018 में रोम के पास आयोजित उनके जन्मदिन समारोह की तस्वीरें और विवरण पहले भी सार्वजनिक डोमेन में आ चुके हैं। हालांकि, अब उस आयोजन को एपस्टीन से जोड़ने के आरोपों ने विवाद खड़ा कर दिया है। अब तक दीया कुमारी या उनके परिवार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक तौर पर इसे “बेबुनियाद” और “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” करार दिया है।
एपस्टीन फाइल्स: क्या है पृष्ठभूमि?
जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी उद्यमी था, जिस पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत को आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया, लेकिन इस पर भी कई सवाल उठे। पिछले कुछ समय से अमेरिकी न्याय विभाग और अदालतों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक हो रहे हैं, जिनमें एपस्टीन के संपर्कों और नेटवर्क का उल्लेख है। इन दस्तावेजों में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों, कारोबारियों और राजनेताओं के नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, किसी भी नाम का उल्लेख अपने आप में दोष सिद्धि का प्रमाण नहीं होता। भारत में भी विपक्षी दल इन दस्तावेजों के हवाले से भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश और ध्यान भटकाने की कोशिश बता रही है।
कांग्रेस बनाम भाजपा
कांग्रेस का आरोप है कि एपस्टीन फाइल्स में भाजपा से जुड़े कुछ नाम सामने आ सकते हैं और सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। पवन खेड़ा ने इसे नैतिक जवाबदेही का मामला बताते हुए कहा कि यदि किसी भी तरह का संबंध या संपर्क रहा है, तो सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं भाजपा का कहना है कि बिना ठोस प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि किसी अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज में किसी कार्यक्रम या व्यक्ति का नाम आ जाने से कोई आपराधिक संबंध सिद्ध नहीं होता। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र से ठीक पहले यह मुद्दा उठाया जाना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
‘रेड रूम’ और अन्य खुलासे
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एपस्टीन से जुड़े कई सनसनीखेज दावे सामने आए हैं। इनमें पेरिस स्थित एक संपत्ति में कथित तौर पर “रेड रूम” बनाए जाने का भी उल्लेख है, जहां विशेष मेहमानों के लिए निजी आयोजन होते थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी भी जांच के दायरे में है। इन खुलासों के चलते दुनिया भर में उन लोगों पर सवाल उठ रहे हैं, जिनका नाम किसी भी रूप में एपस्टीन के संपर्कों में आया है।
मुद्दे को उठाने की तैयारी
राजस्थान की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर तब जब दीया कुमारी विधानसभा में बजट पेश करेंगी। विपक्ष इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे निराधार आरोप बताते हुए पलटवार कर सकता है। कानूनी रूप से भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिकी दस्तावेजों में ऐसा कोई ठोस संदर्भ मौजूद है, जिसे भारतीय एजेंसियां या न्यायालय संज्ञान में लें। फिलहाल, आरोप और प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।