राठिया की मौत संदिग्ध, हाईकोर्ट जज से कराएं जांच
रायपुर ! प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण मामले में लड़ाई लडऩे वाले आदिवासी नेता जयलाल राठिया की संदेहास्पद मौत पर सत्तापक्ष के नेताओं के शामिल होने का आरोप लगाया है
रायपुर ! प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण मामले में लड़ाई लडऩे वाले आदिवासी नेता जयलाल राठिया की संदेहास्पद मौत पर सत्तापक्ष के नेताओं के शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रकरण की जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश से कराने मांग की है। कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी। खरसिया के कुनकुरी में बने रेलवे साइडिंग के लिए आदिवासियों की 300 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। जयलाल ने इस मामले की शिकायत की थी। बाद में हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी। जिससे खलबली मच गई थी। गुरूवार को संदिग्ध हालत में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने आनन-फानन में बिना पोस्टमार्टम करवाए लाश का अंतिम संस्कार करवा दिया।
श्री बघेल ने रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में राठिया की मौत को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा विधायक उमेश पटेल ने यह मामला पिछले बजट सत्र में और उससे पहले भी विधानसभा में उठाया था। कलेक्टर के जरिए जांच हुई और पाया गया कि इस मामले में गड़बड़ी हुई है। सचिव और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई भी हुई लेकिन जांच उससे आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद जयलाल राठिया हाईकोर्ट गए और तभी से राजनीतिक प्रशासनिक स्तर पर हडक़ंप मचा हुआ है। हाईकोर्ट में मामला अब अंतिम चरण में था और जयलाल राठिया किसी भी दबाव में मामला वापस लेने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कहा प्रमुख सवाल यह है कि मौत क्यों और कैसे हुई? अगर तबियत खराब थी तो उन्हें अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया? अगर मौत संदिग्ध थी तो फिर पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया गया? अगर यह मामला संदिग्ध नहीं था तो पुलिस बयान लेने क्यों पहुंची? परिजनों ने कहा कि वे अंतिम संस्कारों के बाद बयान देंगे लेकिन पुलिस नहीं मानी और दबाव डालकर तत्काल बयान लिया, ऐसा क्यों? पुलिस को मौत को सामान्य मौत घोषित करने की हड़बड़ी क्यों थी?
क्या हाईकोर्ट के मामले से इसका संबंध है?
श्री बघेल ने कहा जयलाल राठिया की मौत का मामला और अधिक संदिग्ध इसलिए हो जाता है क्योंकि वे कुनकुनी रेलवे साइडिंग के लिये ली गई जमीन के मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने वाले व्यक्ति थे। राठिया ने ही हाईकोर्ट में आरोप लगाया था कि कुछ लोगो ने आदिवासियों की जमीन धोखाधड़ी करके हड़प ली। उसमें एक प्रमुख नाम गौतम राठिया का है जिसने आदिवासियों से बहुत सी जमीने खरीदी? गौतम राठिया राशनकार्ड धारी है और सरकारी रिकॉर्ड में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला व्यक्ति है तो उसने इतनी जमीने कैसे खरीद ली? इसी जमीन पर बाद में रेलवे साइडिंग बनी है। यह रेलवे साइडिंग वाणिज्य और उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल के परिजनों की है। बताया जा रहा है कि अमर अग्रवाल के राजनीतिक रसूख की वजह से उनके परिजन जयलाल राठिया पर दबाव बनाए हुए थे कि वे हाईकोर्ट से मामला वापस ले लें और जमीन के मसले पर समझौता कर लें। मनीष बंसल नाम के एक दलाल का नाम भी परिजनों और गांव वालों ने लिया है, मनीष बंसल पर 420 के कई मामले दर्ज है और कुनकुनी रलेवे साइडिग को लेकर भी वे विवाद मे रहे है। परिजनो और गांव वालो का कहना है कि मनीष बंसल जयलाल राठिया को लगातार परेशान और प्रताडि़त कर रहे थे। पता चला है कि जिले के कुछ सरकारी अफसर भी जयलाल राठिया पर दबाव बनाए हुए थे कि वे समझौता कर ले।
कांग्रेस ने मांग की है कि जयलाल राठिया की मौत की हाईकोर्ट के न्यायाधीश से जांच करवाई जानी चाहिये। यह जांच की जानी चाहिये कि क्यो पुलिस बयान लेने पहुंची और क्यों पुलिस को हडबडी थी कि इसे सामान्य मौत घोषित किया जाये। मंत्री अमर अग्रवाल के रिश्तेदार शामिल है इसलिये पुलिस कभी इस मामले की जाचं नही कर पाएगी। गौतम राठिया कौन है और उसके पास इतनी जमीन खरीदने के लिये पैसे कहां से आए? किन लोगो ने पैसे दिये और उसके गौतम राठिया को क्या मिला?
इस बात की जांच होनी चाहिये कि जयलाल राठिया पिछले कुछ महीनों में किन लोगो के संपर्क में था? उसके कॉल रिकार्ड से इसका पता चल सकता है। जिस रात जयलाल की मौत हुई, उस रात वह किन लोगो से मिला था? क्या उसके साथ मारपीट की गई या मानसिक रूप से प्रताडि़त किया गया?