प्राइवेट ट्रेन देरी से या पहले पहुंची तो जुर्माना

सरकार रेलवे में निजीकरण को तेज कर रही है. कुछ ट्रेनों को निजी कंपनियों को सोंपा जा चुका है इसतो कई और ट्रेनों को निजी क्षेत्र के हवाले किए जाने की तैयारी हो चुकी है. . अब रेलवे की ओर ने इन ट्रेनों के संचालन को लेकर एक मसौदा तैयार किया गया

Update: 2020-08-13 17:24 GMT

केंद्र की मोदी सरकार भले ही दावे करे कि वो रेलवे को निजी हाथों में नहीं दे रही सिर्फ कुछ ट्रेनों के संचालन का अधिकार निजी कंपनियों को दिया जा रहा है. लेकिन सरकार का हर कदम ये बता रहा है कि भविष्य में देश के अधिकांश ट्रेनों का संचालन निजी कंपनियां द्वारा ही किया जाएगा. निजी कंपनियां ट्रेन चलाएगी तो इसके लिए कुछ नियम भी बनाए गए हैं. रेलवे ने इन नियमों को जारी करते हुए कहा कि प्राइवेट कंपनी द्वारा संचालित कोई भी ट्रेन समय या विलम्ब से किसी स्टेशन पर पहुंचती है तो उसे भारी जुर्माना देना होगा. रेलवे की ओर से कहा गया है कि ये कदम इसलिए है ताकि निजी रेलगाड़ियां समय का पालन करें. नियमों के अनुसारकोई ट्रेन 10 मिनट पहले गंतव्य पर पहुंचती है. तो संचालक को रेलवे को जुर्माने के तौर पर 10 किलोमीटर का ढुलाई शुल्क देना होगा. ढुलाई शुल्क 512 रुपए प्रति किलोमीटर होगा.कोई भी ट्रेन 15 मिनट देरी से पहुंचती है तो उसे 'समयबद्धता में प्रति एक प्रतिशत कमी' के लिए 200 किलोमीटर का अतिरिक्त ढुलाई शुल्क रेलवे को देना होगा.यदि ट्रेन के विलम्ब से पहुंचने के पीछे की वजह रेलवे की कमी है तो फिर ऐसी स्थिति में जुर्माने की राशि रेलवे भरेगीनिजी कंपनी अचानक ट्रेन सेवा रद्द करती है तो उसे हर्जाना देना होगा जो माल ढुलाई का चौथा हिस्सा होगा. लेकिन यदि ट्रेन रद्द होने का कारण रेलवे होता है तो रेलवे निजी कंपनी को उतना ही हर्जाना देगा.यदि मार्ग में कोई विषम परिस्थति उत्पन्न हो जाती है. जिससे ट्रेन विलम्ब से पहुंचती है तो जुर्माना नहीं देना होगा.निजी ट्रेन संचालकों को वर्ष में 95% तक समय का पालन करना होगा. यानी ये साफ है कि भारतीय रेलवे जो अपनी लेट लतीफी के लिए जाना जाता है. वो नहीं चाहता है कि ये परंपरा निजी क्षेत्र भी जारी रखे.

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