पृथ्वीराज चव्हाण बोले, तो क्या अपहरण कर हमारे PM को ले जाएंगे ट्रंप?', भाजपा का पलटवार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत की तुलना वेनेजुएला से करते हुए सवाल उठाया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उसी तरह अपहरण कर सकते हैं, जैसा वेनेजुएला के राष्ट्रपति के साथ किया गया।

Update: 2026-01-06 22:40 GMT
मुंबई : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर टैरिफ लगाए जाने और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को लेकर भारत की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत की तुलना वेनेजुएला से करते हुए सवाल उठाया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उसी तरह अपहरण कर सकते हैं, जैसा वेनेजुएला के राष्ट्रपति के साथ किया गया। चव्हाण की इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे “भारत-विरोधी मानसिकता” करार दिया है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन भारत पर लगाए गए टैरिफ और रूस से तेल आयात को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहा है। साथ ही, वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पृथ्वीराज चव्हाण का आरोप
पृथ्वीराज चव्हाण ने ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार को बाधित करने के लिए टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ कार्रवाई की, वह बेहद चिंताजनक है और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर खतरा पैदा होता है। चव्हाण ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका को किसी भी निर्वाचित नेता का अपहरण करने का कोई अधिकार नहीं है। आज यह वेनेजुएला के साथ हुआ है, कल यह भारत या किसी अन्य देश के साथ भी हो सकता है।”

उनका कहना था कि वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। एक निर्वाचित राष्ट्रपति को पकड़कर दूसरे देश ले जाना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी देश की नीतियां अमेरिका को पसंद नहीं हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि वह उस देश के राष्ट्रपति का अपहरण कर सकता है।

भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल
कांग्रेस नेता ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस होने जा रही है। रूस और चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है, लेकिन भारत ने अब तक कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।

चव्हाण ने कहा, “भारत ने हमेशा की तरह वेनेजुएला के मामले पर कोई स्टैंड नहीं लिया है। क्या सही है, क्या नैतिक रूप से उचित है इस पर सरकार कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही। कल यह भारत के साथ भी हो सकता है।” उनका आरोप था कि यदि अंतरराष्ट्रीय मामलों में किसी एक देश को वर्चस्व स्थापित करने और मनमानी करने दी गई, तो दुनिया एक बेहद खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ेगी।

पीएम मोदी पर निजी छवि को प्राथमिकता देने का आरोप
पृथ्वीराज चव्हाण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह सही और गलत के मुद्दे पर खड़े होने की बजाय अपनी निजी छवि की ज्यादा चिंता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यही रवैया यूक्रेन युद्ध के दौरान भी देखने को मिला, जब भारत ने स्पष्ट रूप से किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया। उन्होंने इजरायल-हमास संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि गाजा में रहने वाले लोगों के खिलाफ “नरसंहार के स्पष्ट मामले” सामने आने के बावजूद भारत चुप रहा।

चव्हाण के मुताबिक, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू प्रधानमंत्री मोदी के निजी मित्र हैं। कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “अब हम अमेरिका से इतने डरे हुए हैं कि वेनेजुएला में जो हुआ है, उसकी आलोचना करने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं।”

भाजपा का तीखा पलटवार
कांग्रेस नेता के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पृथ्वीराज चव्हाण के बयान को “बेशर्माना” और “गैर जिम्मेदाराना” करार दिया। भंडारी ने कहा, “कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत की स्थिति की तुलना वेनेजुएला से करके बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं। कांग्रेस हर दिन और निचले स्तर पर जा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह सवाल उठाकर कि क्या वेनेजुएला में जो हुआ, वह भारत में भी हो सकता है, कांग्रेस अपनी भारत-विरोधी मानसिकता को उजागर कर रही है।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। प्रदीप भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी भारत में अराजकता चाहते हैं और भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की इच्छा रखते हैं। उन्होंने कहा, कांग्रेस और उसके नेता देश के खिलाफ बयान देकर भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

टैरिफ और वेनेजुएला का मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े कूटनीतिक और रणनीतिक सवाल जुड़े हैं। एक तरफ ट्रंप प्रशासन भारत पर टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने छोटे और मध्यम देशों की संप्रभुता को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं। कांग्रेस का तर्क है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिक और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, जबकि भाजपा का कहना है कि कांग्रेस जानबूझकर देश की तुलना अस्थिर देशों से कर रही है, जिससे भारत की छवि को नुकसान पहुंचता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत की भूमिका
वेनेजुएला मामले ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और निर्वाचित सरकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। चव्हाण जैसे नेता इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत के लिए संतुलन साधना आसान नहीं है। एक तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, दूसरी तरफ रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी अहम हित जुड़े हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष का खुलकर विरोध या समर्थन करना कूटनीतिक रूप से जटिल हो सकता है।

सियासी टकराव जारी रहने के संकेत
फिलहाल, पृथ्वीराज चव्हाण के बयान और भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। टैरिफ, वेनेजुएला और भारत की विदेश नीति इन तीनों सवालों ने एक साथ घरेलू राजनीति को गर्मा दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत सरकार इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है या फिर मौजूदा रणनीतिक चुप्पी को ही बनाए रखती है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की विदेश नीति पर हमले के तौर पर लगातार उठाता रह सकता है।

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