एपस्टीन विवाद पर कांग्रेस का हरदीप पुरी पर तीखा हमला, 62 ईमेल और 14 मुलाकातों का दावा; इस्तीफे की मांग तेज

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जून 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ। उनके मुताबिक, एपस्टीन ने पुरी को 30 ईमेल भेजे, जबकि पुरी ने 32 ईमेल का जवाब दिया।

Update: 2026-02-18 05:40 GMT
नई दिल्ली : जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर कांग्रेस ने मंगलवार को हमला तेज कर दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ और दोनों के बीच 14 बैठकें हुईं। कांग्रेस ने पुरी की सफाई को “झूठ” बताते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराई है। उधर, हरदीप पुरी इन आरोपों से पहले ही इन्कार कर चुके हैं और कहा है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे दावे भ्रामक हैं। विवाद अब राजनीतिक तकरार का नया केंद्र बन गया है।

“ईमेल और मुलाकातों का रिकॉर्ड मौजूद”

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जून 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ। उनके मुताबिक, एपस्टीन ने पुरी को 30 ईमेल भेजे, जबकि पुरी ने 32 ईमेल का जवाब दिया। खेड़ा ने दावा किया कि यह आंकड़े दोनों के बीच “नजदीकी और नियमित संवाद” का संकेत देते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुरी-एपस्टीन के बीच 14 बैठकें हुईं, जबकि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से तीन-चार मुलाकातों की बात कही थी। कांग्रेस का कहना है कि यह विरोधाभास अपने आप में सवाल खड़े करता है।

“सफाई में ही झूठ उजागर”: पवन खेड़ा

पवन खेड़ा ने कहा कि हरदीप पुरी आरोपों का सीधा जवाब देने के बजाय राजनीतिक पलटवार कर रहे हैं और कांग्रेस नेताओं, खासकर राहुल गांधी, की आलोचना में जुटे हैं। खेड़ा के मुताबिक, “पुरी अपनी सफाई में जो दलीलें दे रहे हैं, उन्हीं से उनके दावों की असंगति सामने आ रही है।” उन्होंने कहा कि अगर ईमेल संवाद सामान्य या औपचारिक थे, तो उनकी संख्या और आवृत्ति इतनी अधिक क्यों थी? कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि अगर मुलाकातें सीमित थीं, तो 14 बैठकों का रिकॉर्ड कैसे सामने आ रहा है। पार्टी ने इन दावों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

‘डिजिटल इंडिया’ पर भी उठे सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने एक और आरोप जोड़ा। खेड़ा ने कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी सरकार का ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान औपचारिक रूप से लॉन्च भी नहीं हुआ था, तब कथित तौर पर पुरी ने एपस्टीन को इससे संबंधित जानकारी ईमेल के जरिए साझा की। खेड़ा ने सवाल किया कि 2014 में जब पुरी सरकार का हिस्सा नहीं थे, तो उन्हें सरकार की संभावित नीतियों की अग्रिम जानकारी कैसे मिली? और यदि मिली भी, तो किस अधिकार से उन्होंने उसे ऐसे व्यक्ति के साथ साझा किया, जिसे बाद में यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया? कांग्रेस का आरोप है कि यह केवल व्यक्तिगत संपर्क का मामला नहीं, बल्कि संभावित नीति-संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान का मुद्दा है, जिसकी गंभीर जांच होनी चाहिए।

पुरी का पक्ष: आरोप निराधार

हरदीप सिंह पुरी पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे दावे संदर्भ से हटाकर पेश किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय व्यक्तियों से औपचारिक मुलाकातें और संवाद होना असामान्य नहीं है। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि सामान्य औपचारिक संपर्क और नियमित, विस्तृत ईमेल संवाद में फर्क होता है। पार्टी ने पुरी से स्पष्ट और दस्तावेजी जवाब देने की मांग की है।

इस्तीफे की मांग दोहराई

कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से पुरी के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। पवन खेड़ा ने कहा कि “नैतिक आधार पर” पुरी को पहले पद छोड़ना चाहिए और फिर स्वतंत्र जांच का सामना करना चाहिए। खेड़ा ने यह भी पूछा कि “आखिर वे किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं?” उनके मुताबिक, मामले में पारदर्शिता तभी आएगी जब मंत्री पद से हटकर जांच में सहयोग करेंगे। कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की साख और जवाबदेही से जुड़ा है।

राजनीतिक असर 

एपस्टीन प्रकरण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही संवेदनशील माना जाता रहा है। ऐसे में भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में इस नाम का जुड़ना स्वाभाविक रूप से विवाद को और गंभीर बना रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक विमर्श में और तेज हो सकता है। यदि कांग्रेस अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज सार्वजनिक करती है, तो दबाव और बढ़ सकता है। वहीं, यदि पुरी विस्तृत स्पष्टीकरण या साक्ष्य पेश करते हैं, तो विवाद की दिशा बदल सकती है। फिलहाल यह मामला आरोप-प्रत्यारोप के चरण में है। सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है।

इस्तीफे की मांग

एपस्टीन फाइल्स से जुड़े आरोपों ने हरदीप सिंह पुरी को राजनीतिक घेराबंदी के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस 62 ईमेल और 14 मुलाकातों का हवाला देकर इस्तीफे की मांग कर रही है, जबकि पुरी इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। आगे की जांच, दस्तावेजों की उपलब्धता और आधिकारिक स्पष्टीकरण इस विवाद की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस और टकराव का कारण बन गया है।

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