केंद्र को राजनीतिक दलों के विदेशी वित्तपोषण को लेकर नोटिस

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा जिसमें विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन को चुनौती दी गई है

Update: 2018-07-03 01:48 GMT

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा जिसमें विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने भाजपा और कांग्रेस को विदेश से वित्तपोषण का दोषी ठहराया था, जिसके बाद इस संशोधन को दोनों पार्टियों को राहत दिलाने के लिए लाया गया था। 

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई.चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र सरकार को एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में एफसीआरए 2010 में वित्त अधिनियम के अनुच्छेद 236 के जरिए किए गए संशोधन और वित्त अधिनियम 2018 के अनुच्छेद में संशोधन को 'अमान्य, अवैध और असंवैधानिक' घोषित करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि एफसीआरए में संशोधन दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश को पलटने के लिए किया गया था, जिसमें भाजपा और कांग्रेस को विदेशी कंपनियों से चंदा लेने का दोषी पाया गया था।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ याचिका को सर्वोच्च न्यायालय में खारिज कर दिया गया था।

जनहित याचिका के अनुसार, "एफसीआरए 1976 में संशोधन से विदेशी कंपनियों से अथाह धन प्राप्त करने के रास्ते खुल गए, जिस वजह से विदेशी स्रोत से प्राप्त धन वैध हो गया।"

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