इंफाल। लगभग एक वर्ष तक राष्ट्रपति शासन के अधीन रहने के बाद मणिपुर में लोकतांत्रिक सरकार की वापसी हो गई है। भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार शाम राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इंफाल स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ कुकी समुदाय की भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक एल. दिखो ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के कुछ घंटों बाद हुए इस शपथ ग्रहण समारोह को राज्य की राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि
मणिपुर में पिछले वर्ष नौ फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। बीरेन सिंह ने राज्य में भड़की जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि में पद छोड़ा था। तब से राज्य सीधे केंद्र के अधीन प्रशासित हो रहा था। गौरतलब है कि तीन मई 2023 को पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी थी। यह मार्च मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में निकाला गया था। हिंसा में अब तक कुकी और मैतेई समुदायों के सदस्य तथा सुरक्षाकर्मियों सहित करीब 260 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग बेघर हुए हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में नई सरकार के गठन को शांति बहाली की दिशा में अहम माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह और पहली प्रतिक्रिया
बुधवार शाम आयोजित समारोह में भाजपा के गोविंददास कोंथौजम और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के के. लोकेन सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअल माध्यम से शपथ ली। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “उम्मीद है कि सभी लोग शांतिपूर्ण माहौल बनाने में मदद करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुझ पर भरोसा जताया है। मैं उस भरोसे को कायम रखते हुए राज्य में शांति और विकास सुनिश्चित करने का प्रयास करूंगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नए नेतृत्व को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “मुझे विश्वास है कि मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री मणिपुर के मेरे बहनों और भाइयों के विकास एवं खुशहाली के लिए पूरी लगन से काम करेंगे।”
विधायक दल की बैठक में चुने गए नेता
मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में मणिपुर के भाजपा विधायक दल की बैठक में खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। बैठक में भाजपा के 37 में से 35 विधायक उपस्थित थे। दो विधायक बीमारी के कारण शामिल नहीं हो सके। बैठक में पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी संबित पात्रा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी भी मौजूद रहे। इसके बाद नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों की बैठक हुई। इसमें एनपीपी के छह, एनपीएफ के पांच और तीन निर्दलीय विधायकों सहित भाजपा विधायक शामिल हुए। गठबंधन सहयोगियों के समर्थन से सरकार गठन का रास्ता साफ हुआ।
संतुलन की राजनीति
नई सरकार के गठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन कुकी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं। दूसरे उपमुख्यमंत्री एल. दिखो नगा समुदाय से हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीन प्रमुख समुदायों को नेतृत्व में प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने राज्य में विश्वास बहाली और सामंजस्य का संदेश देने की कोशिश की है।
खेमचंद सिंह: संगठन से सत्ता तक का सफर
62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें शांत स्वभाव, संगठन क्षमता और प्रशासनिक समझ के लिए जाना जाता है। राजनीति में उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने 2012 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार से हार गए। 2013 में वे भाजपा में शामिल हो गए। 2017 में वे पहली बार इंफाल पश्चिम जिले की सिंगजामेई सीट से विधायक चुने गए। बीरेन सिंह के पहले कार्यकाल में वे विधानसभा अध्यक्ष बने। 2022 में दूसरी बार विधायक चुने जाने के बाद उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। राजनीति के अलावा खेमचंद सिंह ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष भी रहे हैं और पूर्वोत्तर भारत में इस खेल को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। वे ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट धारक हैं।
नई सरकार के सामने चुनौतियां
नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में शांति और विश्वास बहाली की है। जातीय हिंसा के कारण समाज में गहरी दरारें उभरी हैं। विस्थापित लोगों का पुनर्वास, राहत शिविरों का प्रबंधन, और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना प्राथमिकता होगी। इसके अलावा आर्थिक पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे का विकास और युवाओं के लिए रोजगार सृजन जैसे मुद्दे भी अहम हैं। राष्ट्रपति शासन के दौरान प्रशासनिक निर्णय केंद्र के स्तर पर लिए जा रहे थे। अब राज्य सरकार को स्थानीय संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए समन्वित प्रयास करने होंगे।
केंद्र का भरोसा और भविष्य की दिशा
भाजपा नेतृत्व ने खेमचंद सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य की कमान सौंपी है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य को स्थिर नेतृत्व और प्रभावी प्रशासन की आवश्यकता है। विश्लेषकों का मानना है कि खेमचंद सिंह का संगठनात्मक अनुभव और विभिन्न समुदायों के साथ संवाद क्षमता राज्य में राजनीतिक स्थिरता ला सकती है। हालांकि, यह आसान नहीं होगा, क्योंकि हिंसा के घाव अभी भी ताजा हैं।
शांति और विकास की उम्मीद
राष्ट्रपति शासन की समाप्ति और नई सरकार के गठन से मणिपुर में राजनीतिक प्रक्रिया को नई गति मिली है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार किस तरह शांति बहाल करने, सामाजिक सद्भाव मजबूत करने और विकास की रफ्तार बढ़ाने में सफल होती है। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन उम्मीद भी उतनी ही बड़ी है कि वे मणिपुर को स्थिरता और प्रगति की राह पर आगे बढ़ाएंगे।