सालों से न चुनाव, न ही हिसाब-किताब सार्वजनिक
रेडाक्रास सोसायटी कहने को तो समाजसेवा के लिए बनी है, लेकिन रायगढ़ जिले में रेडक्रास सोसाएटी केवल कागजों में ही संचालित हो रही है
रायगढ़। रेडक्रास सोसायटी कहने को तो समाजसेवा के लिए बनी है, लेकिन रायगढ़ जिले में रेडक्रास सोसाएटी केवल कागजों में ही संचालित हो रही है। चूंकि 20 सालों से इस समिति का न तो कोई हिसाब किताब सार्वजनिक होता है और न ही इसके चुनाव हो रहे हैं।
स्थिति यह है कि रायगढ़ जिला मुख्यालय सहित खरसिया में चल रही मेडिकल दुकानों के संचालक भी इसका फायदा उठा रहे हैं। सदस्यों की संख्या 20 साल से जस की तस है इतना ही नहीं इसकी संपत्ति के मामले में भी कोई जांच नहीं हो पा रही है।
संविदा में भर्ती कर्मचारी 20 साल से लगातार काम कर रहे हैं और हाल ही में इन कर्मचारियों ने अपने आप अपना वेतन भी बढ़ा लिया है। इसकी जानकारी तक कलेक्टर को नहीं है जो कि पदेन अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहती हैं।
इस पूरे मामले में शहर के समाजसेवी बजरंग अग्रवाल व पूर्व अध्यक्ष संतोष अग्रवाल के अलावा आरटीआई कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी यह आरोप लगा रहे हैं कि 20 सालों से रेडक्रास सोसाएटी का विधिवत चुनाव नहीं होना अपने आप में कई संदेहों को जन्म देता है। सेवा भावी संस्था में इस प्रकार की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए।
इन सब का कहना है कि बीते कई साल से इसका हिसाब किताब भी न तो सार्वजनिक हो रहा है और न ही पदाधिकारियों की गतिविधियों की जानकारी मिल रही है। यह भी बताया जा रहा है कि कलेक्टर को इस मामले में कई बार अवगत कराया गया, पर अब तक मामले में गंभीरता नहीं बरती जा रही है।
वहीं शहर के समाजसेवियों का कहना है कि कलेक्टर के द्वारा इस मामले में बैठक बुलाकर समिति की गतिविधियों के बारे में जानकारी लें और इसका हिसाब किताब सार्वजनिक करें। ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी भी न हो सके।
कार्रवाई होगी
इस संबंध में कलेक्टर शम्मी आबिदी का कहना था कि लंबे समय से रेडक्रास सोसाएटी का चुनाव नहीं हुआ है और न ही कोई बैठक और संविदा नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी की जानकारी भी मिल रही है। इन सभी मामले में जल्द ही बैठक के बाद कार्रवाई की जाएगी।