जासूसी मामले में एक और को एनआईए अदालत ने दिया दोषी करार

 राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने यहां मोहम्मद सलीम को जासूसी के एक मामले में नकली मुद्रा रखने व आतंकवादी हमले की साजिश रचने का दोषी करार दिया

Update: 2018-07-31 14:57 GMT

चेन्नई।  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने यहां मोहम्मद सलीम को जासूसी के एक मामले में नकली मुद्रा रखने व आतंकवादी हमले की साजिश रचने का दोषी करार दिया। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत ने सोमवार को 43 साल के सलीम को 2014 में श्रीलंका के कोलंबो में पाकिस्तान उच्च आयोग के तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचने को लेकर दोषी करार दिया।

फैसले में कहा गया कि सलीम व अन्य की मंशा अमेरिकी वाणिज्य दूतावास व चेन्नई के अन्य सार्वजनिक जगहों व दक्षिण भारत के दूसरे प्रतिष्ठानों में विस्फोट करने की थी।

एनआईए अधिकारी ने कहा कि सलीम को पांच साल की कैद व 2000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

एनआईए ने इस मामले को तमिलनाडु पुलिस से जून, 2014 में अपने हाथ में लिया था। एनआईए ने कहा कि सलीम ने आतंकी गतिविधियों के खर्चे के लिए नकली भारतीय मुद्रा प्राप्त की थी।

बयान में कहा गया कि 28 अप्रैल 2014 को श्रीलंकाई नागरिक मोहम्मद साकिर हुसैन कोलंबो में पाकिस्तान उच्चायोग के अपने हैंडलर के निर्देश पर आतंकी कार्य को अंजाम देने के लिए चेन्नई पहुंचा था। हुसैन को तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हुसैन को इस मामले में पहले ही दोषी करार दिया गया है।

सलीम व उसके सहयोगियों में से एक सिवबालन को एक मई 2014 को 250,000 रुपये की नकली भारतीय मुद्रा के साथ गिरफ्तार किया गया था।

एनआईए ने हुसैन, सिवबालन व सलीम पर अक्टूबर 2014 में आपराधिक साजिश रचने व भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं व गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किए थे।

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