जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं;

Update: 2026-08-10 18:45 GMT

यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं.

इस साल का रिकॉर्ड सूखा और गर्म मौसम ने ऊर्जा उत्पादन, शिपिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को भारी चोट पहुंचाई है. इसके साथ ही जंगल की आग भी यूरोप में अब तक की सबसे बड़ी आग बनने की राह पर है. वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम की मार को इस हद तक पहुंचाने में ग्लोबल वार्मिंग की भी बड़ी भूमिका है.

अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि यूरोप की अर्थव्यवस्थापर कुल मिला कर पहले ही गर्म मौसम की मार की कीमत सैकड़ों अरब यूरो के पार जा चुकी है. हालांकि वे यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि यह तो सिर्फ शुरुआत है. बढ़ते तापमान के साथ यह नुकसान और बढ़ेगा.

यूरोप में जलवायु किसी भी और महाद्वीप की तुलना में ज्यादा तेजी से बदल रही है. इसकी वजह से होने वाले नुकसान सार्वजनिक धन को नुकसान पहुंचा रहा है जो पहले से ही तनाव में है. जलवायु परिवर्तन यहां का पर्यटन नक्शा बदलने, महंगाई तेज करने के साथ ही यह भी सोचने पर मजबूर कर रहा है कि ऊर्जा कैसे पैदा होगी और सामान की ढुलाई कैसे होगी.

मानहाइम यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री सेरिष उस्मान कहते हैं, "आर्थिक नजरिए से 2026 को खासतौर से चिंताजनक बनाने के पीछे चरम घटनाओं के कई प्रकरण हैं. तेज गर्मी, सूखा, जंगल की आग... इस तरह की घटनाएं एक ही साथ और ज्यादातर समान इलाकों में हो रही हैं जिससे उनका असर बढ़ गया है."

गर्मी की वजह से रिकॉर्ड नुकसान

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जून और जुलाई में तापमान रिकॉर्ड ऊंचाइयों के पार गया जिसकी वजह से आर्थिक नुकसान के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने के आसार हैं.

राइन और डैन्यूब नदियां जो माल ढुलाई का व्यस्त जलमार्ग बनाती हैं उनमें पानी का स्तर घटने की वजह से ट्रैफिक अत्यंत कम हो गया है. आधे दर्जन से ज्यादा नाभिकीय जेनरेटर को बंद या उनसे बिजली उत्पादन में कमी करनी पड़ी है क्योंकि उन्हें ठंडा करने में दिक्कत आ रही है. कृषि उत्पादन के अनुमानों में कटौती की गई है क्योंकि फसल देर से तैयार हो रही हैं. मक्का और सूरजमुखी के उत्पादन में जुलाई में 6-7 फीसदी का नुकसान हो चुका है.

गर्मी की वजह से इंसानों की उत्पादकता घट रही है और जर्मनी में पहले ही दस हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसी बीच आग बुझाने या फिर ऊर्जा के इस्तेमाल को घटाने के आपातकालीन उपायों से बजट पर दबाव बढ़ रहा है.

अनुमान है कि सिर्फ राइन नदी में घटे ट्रैफिक से जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर 0.3 फीसदी का नुकसान होगा. इसी तरह हंगरी की एमबीएच बैंक के मुताबिक जीडीपी को हर हफ्ते 0.1 फीसदी का नुकसान नाभिकीय जेनरेटरों के बंद होने की वजह से हो रहा है.

राइन की धारा दो हिस्सों में बंट सकती है

जर्मनी में घरेलू जलमार्गों के ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि राइन नदी में लगातार कम होते पानी की वजह से यह दो धाराओं में बंट सकती है. पश्चिमी जर्मनी में शिपिंग और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी काउब गेज में इस हफ्ते पहली बार पानी की ऊंचाई ईकाई अंक में पहुंचने के आसार हैं. यह गेज जर्मनी की सबसे लंबी नदी मिडिल राइन में कोब्लेंज और माइंज के बीच है. चेतावनी दी जा रही है कि पानी का स्तर इतना नीचे है कि कारोबारी शिपिंग माल की ढुलाई नहीं कर पाएगा. नदी के रास्ते से माल की ढुलाई घटने या बंद होने की वजह से जर्मी के कई राज्यों में रविवार को ट्रक चलाने पर लगी पाबंदी को फिलहाल हटा लिया गया है.

जर्मन इंश्योरेंस कंपनी आलियांज का आकलन है कि केवल जून महीने की दो हफ्ते की गर्मी के कारण यूरोप की जीडीपी को 0.3 फीसदी का नुकसान हुआ. 2030 तक जलवायु परिवर्तन की वजह से स्पेन, फ्रांस और इटली की अर्थव्यवस्थाओं के विकास को 5-7 फीसदी तक का नुकसान होने के आसार हैं.

आलियांज के अर्थशास्त्री हाजेम क्रिषेने कहना है, "इस साल के लिए कुल मिलाकर नुकसान बहुत ज्यादा होगा. इनमें अल नीनो की वजह से होने वाला आग, सूखा और बाढ़ की दूसरी घटनाओं के आंकड़े शामिल नहीं हैं."

यूरोजोन मे विकास की दर इस साल एक फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था इसे देखते हुए यह नुकसान काफी बड़ा है. हालांकि इसके बाद भी उस्मान का कहना है कि आर्थिक नुकसान को पूरी तरह से आने वाले कई सालों में ही महसूस किया जा सकेगा.

उस्मान का कहना है, "आप यह उम्मीद करेंगे कि एक साल में नुकसान चरम घटना की वजह से सबसे बड़ा होगा और फिर घट जाएगा लेकिन हम इसका उल्टा देख रहे हैं. आर्थिक असर अगले साल और बढ़ जाएगा क्योंकि चरम मौसमी घटनाएं आर्थिक परिणामों का एक धीमा चक्र शुरू करेंगी."

दक्षिणी यूरोप में पर्यटन घटा महंगाई बढ़ी

दक्षिणी यूरोप को बढ़ते तापमान का सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है क्योंकि यहां पर्यटन से होने वाली कमाई घट रही है, फसलें बेकार हो रही हैं और लोग यहां से पलायन कर रहे हैं. आईएनजी बैंक के अर्थशास्त्री कार्स्टेन ब्रेस्की का कहना है, "क्या आपको दक्षिणी इटली या स्पेन में 45 डिग्री तापमान में सैलानी दिखेंगे? मुझे नहीं दिखेंगे. तो मुझे लगता है कि पर्यटन की प्रकृति बदलेगी."

दक्षिणी यूरोप को शायद पूरे साल सैलानी ज्यादा मिलेंगे लेकिन गर्मियों में जो सैलानियों की बाढ़ आती थी वो घटेगी क्योंकि लोक उत्तर की ओर जाएंगे. इससे दक्षिण में मेहमानों की आवभगत करने वाले उद्योग का नुकसान होगा.

दक्षिण के इलाकों में चरम मौसम की वजह से खाने पीने की चीजों की कीमत पर भी बुरा असर होगा. इससे महंगाई को लक्षित सीमा तक रखने के लिए जूझ रहे यूरोपीयन सेंट्रल बैंक की भी मुश्किलें बढ़ेंगी.

अत्यधित गर्मी ने 2022 में यूरोजोन की महंगाई 0.34 फीसदी बढ़ा दी जबकि दक्षिण पर इसका असर काफी ज्यादा हुआ. इस बीच नदियों के रास्ते ढुलाई रुकने का यूरोप के कई हिस्सों में ईंधन के पहुंचने पर असर हो रहा है. इससे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में कीमतों में काफी फर्क आ गया है.

ईसीबी के बजट पर गर्मी का असर

टैक्स से आने वाले सालाना राजस्व में कमी फ्रांस में 1.8 फीसदी जबकि इटली और स्पेन में 1.3 फीसदी रहने का अनुमान है. कारोबारों का मुनाफा भी घटेगा, निवेश में गिरावट आएगी और आर्थिक नुकसान बढ़ेगा.

इस बीच कीमतें बढ़ेंगी क्योंकि सरकारों को आपातकालीन उपायों के लिए धन देना होगा साथ ही भविष्य के लिए ऊर्जा उत्पादन या ढुलाई के मार्गों को इन सबसे बचाने के लिए निवेश करना होगा.

ब्रायगेल थिंक टैंक के सीनियर फेलो हीथर ग्राबे का कहना है, "एक प्रमुख चिंता यह है कि देशों अब भी तात्कालिक आपातकालीन उपायों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं जो ज्यादा खर्चीला भी है और काफी अक्षम भी."

अगर सरकारें ज्यादा खर्च करने की कोशिश करेंगी तो निवेशक पीछे हट सकते हैं. कर्ज का स्तर पहले से ही बहुत ऊंचा है खासतौर फ्रांस और इटली में. देशों को रक्षा और हरित ऊर्जा पर भी निवेश करना है.

ऐसे में ईसीबी की उलझन बढ़ सकती है जो देशों के कर्ज पर पिछले दशक में खरबों यूरोप खर्च कर चुका है जब महंगाई कम थी और कर्ज को सस्ता रखा गया था.

अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि खर्चों की लंबी सूची को देखते हुए यह लगभग तय है कि सरकारों का कर्ज बढ़ेगा और दबाव घटाने के लिए ईसीबी को ज्यादा उपाय करने होंगे.

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