Wedding ceremonies: चार दिन और विवाह की धूम, फिर 36 दिन बाद बजेगी शहनाई, जानें शुभ मुहुर्त
ज्योतिषीय दृष्टि से अप्रैल में भी विवाह के लिए बहुत अधिक शुभ तिथियां नहीं हैं। प्रोफेसर पांडेय के अनुसार, पूरे अप्रैल महीने में केवल 20 और 21 अप्रैल ही ऐसे दिन हैं जिन्हें अत्यंत शुभ माना गया है।
वाराणसी : Wedding Ceremonies: देशभर में फरवरी से शुरू हुआ शादी-ब्याह का सीजन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 मार्च के बाद विवाह समारोहों पर अस्थायी विराम लग जाएगा। इसकी वजह है कि 15 मार्च की भोर में 3:36 बजे सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास आरंभ हो जाएगा। खरमास के दौरान सनातन परंपरा में विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। ऐसे में 20 अप्रैल तक शादी-विवाह के आयोजन नहीं किए जाएंगे। इसके बाद 20 अप्रैल से एक बार फिर वैवाहिक मुहूर्त शुरू होंगे और मंडप सजने लगेंगे।
सूर्य के राशि परिवर्तन से शुरू होगा खरमास
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय के अनुसार, सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो जाता है। उन्होंने बताया कि 15 मार्च से शुरू होने वाला यह काल लगभग 36 दिनों तक चलेगा। इस दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। हालांकि सूर्य लगभग एक माह बाद 14 अप्रैल की सुबह 11:45 बजे मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर मेष संक्रांति, सतुआ संक्रांति और वैशाखी का पर्व मनाया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद विवाह के शुभ मुहूर्त 20 अप्रैल से ही उपलब्ध होंगे।
अप्रैल में केवल दो दिन अत्यंत शुभ
ज्योतिषीय दृष्टि से अप्रैल में भी विवाह के लिए बहुत अधिक शुभ तिथियां नहीं हैं। प्रोफेसर पांडेय के अनुसार, पूरे अप्रैल महीने में केवल 20 और 21 अप्रैल ही ऐसे दिन हैं जिन्हें अत्यंत शुभ माना गया है। अन्य तिथियों में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के कारण विभिन्न प्रकार के वेध या दोष बन रहे हैं। ऐसे में इन दिनों में विवाह करना ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उचित नहीं माना जाता। उन्होंने बताया कि 25, 26, 27, 28 और 30 अप्रैल को भी कुछ मुहूर्त बन रहे हैं, लेकिन इनमें ग्रहों की युति और वेध के कारण ये पूरी तरह शुभ नहीं माने जा रहे। 25 और 26 अप्रैल को मघा नक्षत्र में केतु की युति है। 27 अप्रैल को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में मंगल वेध बन रहा है। 28 अप्रैल को उत्तरा फाल्गुनी में मंगल वेध और हस्त नक्षत्र में शनि वेध का प्रभाव है। 30 अप्रैल को स्वाति नक्षत्र में राहु वेध बन रहा है। इन ग्रह स्थितियों के कारण इन तिथियों को विवाह के लिए अनुकूल नहीं माना गया है।
मई में भी सीमित मुहूर्त
मई महीने में भी विवाह के लिए बहुत कम शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार मई में कुल मिलाकर केवल पांच दिन ही ऐसे हैं जिन्हें अत्यंत शुभ माना जा सकता है। तीन मई को अनुराधा नक्षत्र में विवाह का मुहूर्त बनता है, लेकिन उस दिन सूर्यवेध के कारण मृत्युबाण योग बन रहा है, इसलिए यह तिथि विवाह के लिए उपयुक्त नहीं मानी गई है। इसके बाद पांच, छह, सात और आठ मई को विवाह के लिए अच्छे मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसके बाद फिर से ग्रह स्थितियों के कारण कई तिथियां अशुभ हो जाती हैं। 12 मई को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में शनि की युति है। 13 मई को भाद्रपद नक्षत्र में शनि की युति और रेवती में मृत्युबाण योग बन रहा है। 15 और 16 मई को मासांत दोष के कारण विवाह योग्य मुहूर्त नहीं हैं।
अधिमास के कारण फिर लगेगा विराम
17 मई से अधिमास (मलमास) आरंभ हो जाएगा। अधिमास को भी मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इस कारण विवाह समारोहों पर लगभग एक महीने का और विराम लग जाएगा। अधिमास 15 जून को समाप्त होगा। इसके बाद फिर से विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।
जून और जुलाई में कुछ अवसर
अधिमास समाप्त होने के बाद जून महीने में कुछ शुभ तिथियां मिलेंगी। जून में 19, 20, 21, 27, 28 और 29 जून को विवाह के लिए अच्छे मुहूर्त बताए गए हैं। इसके बाद जुलाई महीने की शुरुआत में भी कुछ तिथियां अनुकूल रहेंगी। जुलाई में 1, 6, 7 और 8 जुलाई को विवाह के लिए शुभ लग्न हैं। लेकिन इसके बाद ग्रहों की स्थिति फिर से बदलने लगेगी। 12 जुलाई से शुक्र का वार्धक्य आरंभ होगा और 15 जुलाई को शुक्र अस्त हो जाएंगे। इसके कारण फिर से मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी।
चातुर्मास के बाद नवंबर में फिर बजेगी शहनाई
जुलाई के अंत में 25 जुलाई को हरिशयन एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा। चातुर्मास के दौरान भी विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस प्रकार ज्योतिषीय गणना के अनुसार जुलाई के बाद विवाह समारोहों पर लंबा विराम लग जाएगा। इसके बाद शादियों का अगला बड़ा सीजन नवंबर महीने में शुरू होगा, जब एक बार फिर शहनाइयों की गूंज और विवाह समारोहों की रौनक देखने को मिलेगी।