तमिलनाडु: सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में हर हफ्ते मिलेगी 'चिकन बिरयानी'! राज्य सरकार कर रही विचार

तमिलनाडु सरकार राज्य की प्रमुख मिड-डे मील योजना के तहत सफ्ताह में एक बार 'चिकन बिरयानी' शुरू करने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद पोषण में सुधार करना और स्कूली खाने को छात्रों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।;

Update: 2026-07-29 06:36 GMT

चेन्नई,। तमिलनाडु सरकार राज्य की प्रमुख मिड-डे मील योजना के तहत सफ्ताह में एक बार 'चिकन बिरयानी' शुरू करने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद पोषण में सुधार करना और स्कूली खाने को छात्रों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

यह प्रस्ताव अभी सरकार के विचाराधीन है और अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह देश के सबसे पुराने स्कूल न्यूट्रिशन प्रोग्राम में एक अहम बदलाव होगा।

अधिकारियों ने बताया कि कोई भी फैसला सोशल वेलफेयर और महिला सशक्तिकरण विभाग के साथ बातचीत करके लिया जाएगा, जो पूरे राज्य में मिड-डे मील स्कीम को लागू करता है।

यह कदम सरकार की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनके जरिए वह बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर सरकारी स्कूलों में छात्रों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने और उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

प्रस्तावित चिकन बिरयानी से मौजूदा मेन्यू में एक और अच्छा विकल्प जुड़ने की उम्मीद है, साथ ही इससे छात्रों को हफ्ते में एक बार प्रोटीन से भरपूर खाना भी मिल सकेगा।

सरकार मिड-डे मील स्कीम के तहत परोसे जाने वाले खाने की कुल क्वालिटी को बेहतर बनाने के सुझावों पर भी विचार कर रही है, जिसमें स्कूलों में सप्लाई किए जाने वाले चावल की क्वालिटी भी शामिल है। अधिकारियों का मानना ​​है कि बेहतर क्वालिटी का खाना इस प्रोग्राम की असरदारता को और बढ़ा सकता है। इस प्रोग्राम ने क्लासरूम में बच्चों की भूख मिटाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के एनरोलमेंट और स्कूल में बने रहने की दर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

तमिलनाडु की दोपहर के भोजन की योजना में अभी कक्षा 1 से 10 तक के छात्र शामिल हैं और इससे सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 40 लाख बच्चों को फायदा होता है।

मुख्यमंत्री की नाश्ता योजना में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र शामिल हैं और हाल ही में इसके विस्तार के बाद इससे लगभग 32 लाख बच्चों को फायदा होने की उम्मीद है। सरकार नाश्ते और दोपहर के भोजन को हायर सेकेंडरी कक्षाओं के छात्रों तक बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है।

अगर दोपहर के भोजन के कार्यक्रम को 11वीं और 12वीं कक्षा तक बढ़ाया जाता है, तो अनुमान है कि इससे लगभग आठ लाख और छात्रों को फायदा होगा। शिक्षा विशेषज्ञों और स्कूल प्रशासकों का लंबे समय से यह मानना ​​रहा है कि हायर सेकेंडरी छात्रों को पोषण संबंधी सहायता देने से स्कूल में उपस्थिति बेहतर होगी, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या कम होगी और पढ़ाई-लिखाई में बेहतर प्रदर्शन में मदद मिलेगी, खासकर कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए।

अगर चिकन बिरयानी को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह स्कूल में पोषण और छात्रों के कल्याण के प्रति तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता की दिशा में एक और कदम होगा।

यह राज्य हमेशा से भोजन-आधारित कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने में अग्रणी रहा है और इसकी दोपहर के भोजन की योजना देशभर में इसी तरह की पहलों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करती है।


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