जन्म-मृत्यु पंजीकरण में देरी पर सख्ती की तैयारी, संसद में आज संशोधन विधेयक पेश करेंगे अमित शाह

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय के बाद कराया जाता है तो उसकी अवधि के आधार पर अलग-अलग स्तर की स्वीकृति लेनी होगी। यदि पंजीकरण में एक से दो वर्ष तक की देरी होती है तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।;

Update: 2026-07-29 06:45 GMT

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार कई अहम विधेयकों को सदन के सामने रखने जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के मामलों में देरी से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पंजीकरण पर अंकुश लगेगा और नागरिकों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनेंगे।

देरी से पंजीकरण के लिए अधिकारियों की मंजूरी होगी अनिवार्य

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय के बाद कराया जाता है तो उसकी अवधि के आधार पर अलग-अलग स्तर की स्वीकृति लेनी होगी। यदि पंजीकरण में एक से दो वर्ष तक की देरी होती है तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं, दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर संबंधित व्यक्ति को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होगा। न्यायिक अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देंगे। सरकार का तर्क है कि इस प्रक्रिया से गलत दस्तावेजों के आधार पर होने वाले फर्जी पंजीकरण को रोका जा सकेगा।

वेरिफिकेशन के बाद ही होगा रजिस्ट्रेशन

संशोधन विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि विलंब से होने वाले प्रत्येक पंजीकरण से पहले संबंधित अधिकारी विस्तृत सत्यापन करेंगे। दस्तावेजों की जांच, स्थानीय स्तर पर पुष्टि और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद ही आवेदन स्वीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही देर से पंजीकरण कराने वाले आवेदकों को निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा। हालांकि शुल्क की राशि कानून के लागू होने के बाद अधिसूचित नियमों के जरिए तय की जाएगी।

डिजिटल डेटाबेस से जुड़ेगा पूरा रिकॉर्ड

सरकार जन्म और मृत्यु से जुड़े सभी रिकॉर्ड का राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटलीकरण भी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पूरे देश का डेटा एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में संग्रहीत किया जाएगा। इस डेटाबेस को आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे विभिन्न सरकारी सेवाओं में दस्तावेजों का सत्यापन आसान होगा और अलग-अलग विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

ऑनलाइन उपलब्ध होंगे जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र

नए प्रावधान लागू होने के बाद नागरिकों को जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे आवेदन और डाउनलोड की प्रक्रिया सरल होगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और नागरिक सेवाओं में तेजी आएगी।

जन्म प्रमाण पत्र की बढ़ेगी उपयोगिता

संशोधन विधेयक के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र को कई सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं में प्रमुख पहचान दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसका इस्तेमाल स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरियों में आवेदन, पासपोर्ट, आधार कार्ड और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य विभिन्न दस्तावेजों में अलग-अलग जानकारी की समस्या को कम करना और नागरिकों की पहचान संबंधी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

मृत्यु प्रमाण पत्र भी कई कानूनी प्रक्रियाओं में अहम

मृत्यु प्रमाण पत्र पहले से ही कई कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उपयोग उत्तराधिकार संबंधी मामलों, बीमा दावों, पेंशन लाभ, संपत्ति हस्तांतरण, बैंक खाते बंद कराने और सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने में किया जाता है। सरकार का कहना है कि समय पर पंजीकरण और प्रमाण पत्र जारी होने से इन प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी कम होगी और विवादों की संभावना भी घटेगी।

1969 के कानून में होगा संशोधन

वर्तमान में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत अनिवार्य है। प्रस्तावित संशोधन इसी कानून को अधिक आधुनिक और डिजिटल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए लाया जा रहा है। विधेयक के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि अधिनियम के तहत जारी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का कानूनी रूप से मान्य प्रमाण हैं। इसलिए इनकी विश्वसनीयता बनाए रखने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को और मजबूत बनाना आवश्यक है। यदि संसद से यह संशोधन विधेयक पारित हो जाता है तो जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिक सेवाओं में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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