नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। 92 ठिकानों पर छापेमारी, 360 गवाहों के बयान और एनटीए विशेषज्ञों की गिरफ्तारी से जांच तेज।;

Update: 2026-07-29 07:22 GMT
नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ लगभग 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल कर दी है। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच के बीच एजेंसी ने अदालत को बताया कि कई अहम डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य अभी भी स्कैनिंग प्रक्रिया में हैं। अदालत ने शेष दस्तावेज दाखिल करने के लिए CBI को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त तय की है।

20 हजार पन्नों की चार्जशीट में कई अहम साक्ष्य शामिल

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट को बताया कि आरोप पत्र में करीब 20 हजार पन्नों के दस्तावेज, गवाहों के बयान, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। अदालत ने पूछा कि चार्जशीट में जिन दस्तावेजों और बयानों का उल्लेख किया गया है, वे रिकॉर्ड पर क्यों नहीं हैं। इस पर CBI ने स्पष्ट किया कि एनेक्सचर दस्तावेजों की स्कैनिंग अंतिम चरण में है और उन्हें जल्द ही अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।

13 आरोपियों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज

CBI ने 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। इन आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, साक्ष्य मिटाने और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य

जांच एजेंसी ने अब तक 360 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। चार्जशीट में 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। CBI का कहना है कि डिजिटल फोरेंसिक जांच, हस्तलेख विशेषज्ञों की रिपोर्ट और तकनीकी विश्लेषण से यह संकेत मिले हैं कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से लीक हुए थे और आरोपियों की इसमें भूमिका रही।

92 ठिकानों पर छापेमारी, डिजिटल नेटवर्क की जांच

उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के बाद CBI ने 12 मई 2026 को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 72 अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम बनाई गई, जिसमें साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल थे। जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में कुल 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इन छापों में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए, जिनकी फोरेंसिक जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी गईं।

एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ भी गिरफ्त में

CBI के अनुसार, इस मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनमें केमिस्ट्री, फिजिक्स और बायोलॉजी विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बिचौलियों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।

बैंक खाते और लॉकर किए गए फ्रीज

जांच एजेंसी ने पेपर लीक से जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल की है। CBI ने आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट फ्रीज किए हैं। एजेंसी का मानना है कि वित्तीय लेनदेन की जांच से पूरे नेटवर्क और लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। CBI का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी नए साक्ष्य सामने आने की संभावना है।

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