चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र सरकार तैयार कर रही है राष्ट्रीय पॉलिसी फ्रेमवर्क

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार गंभीर है और इससे निपटने के लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में बच्चों से संबंधित अश्लील कंटेंट के प्रसार को रोकने के साथ-साथ वयस्कों की बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने के मामलों को भी शामिल किया जा सकता है।;

Update: 2026-10-27 12:54 GMT

नई दिल्ली। चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार गंभीर है और इससे निपटने के लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में बच्चों से संबंधित अश्लील कंटेंट के प्रसार को रोकने के साथ-साथ वयस्कों की बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने के मामलों को भी शामिल किया जा सकता है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की पीठ को बताया कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क केवल चाइल्ड पोर्नोग्राफी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिना सहमति के अश्लील कंटेंट साझा करने और इससे जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने पर भी ध्यान देगा।

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किए जा रहे अश्लील कंटेंट, मॉर्फ्ड तस्वीरों और ऐसी तस्वीरों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई, जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा और शरीर वास्तविक व्यक्ति से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर इस तरह की सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।

एसजी तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित विधेयक में इंटरनेट प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज) की जिम्मेदारियों को बढ़ाया जा सकता है। उनकी भूमिका केवल आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऐसे कंटेंट के अपलोड होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।

केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कोई तीसरा व्यक्ति भी सद्भावना के साथ शिकायत दर्ज करा सकेगा।

सरकार के अनुसार, इस पॉलिसी फ्रेमवर्क का उद्देश्य बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने, एआई से तैयार किए गए आपत्तिजनक कंटेंट और मॉर्फ्ड तस्वीरों के प्रसार से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटना है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर नीतिगत स्तर पर विचार किया जा रहा है।


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