ई20 पेट्रोल के खिलाफ पैसे देकर चलाया गया अभियान": नितिन गडकरी ने किया बड़ा दावा, कहा- अब सारा शोर खत्म

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई20 पेट्रोल (E20 Petrol) के खिलाफ चले विरोध को 'पेड कैंपेन' करार दिया। हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि बायोफ्यूल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। जानिए E20 ईंधन से जुड़ा पूरा विवाद और सरकार का रुख।;

Update: 2026-10-27 10:40 GMT

नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने नीति (E20 Petrol) को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान सामने आया है। उद्योग संगठन सीआईआई (CII) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने दावा किया कि तीन महीने पहले ई20 ईंधन के खिलाफ जो हंगामा खड़ा किया गया था, वह पूरी तरह से पैसे देकर चलाया गया एक 'पेड कैंपेन' (Paid Campaign) था। उन्होंने कहा कि अब यह सारा शोर खत्म हो चुका है और लोग इसके फायदों को समझ रहे हैं।

विदेशी मुद्रा की बचत और फ्लेक्स-फ्यूल को अनुमति

गडकरी का यह बयान सरकार द्वारा 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989' में संशोधन की अधिसूचना जारी करने के ठीक एक दिन बाद आया है। नए नियमों के तहत अब ई100 (लगभग शुद्ध इथेनॉल) तक चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों को मंजूरी दे दी गई है। गडकरी ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण से भारत कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा, जिससे देश की कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने का भरोसा दिया।

इथेनॉल सीमा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की योजना नहीं: हरदीप पुरी

दूसरी ओर, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गोवा में आयोजित 'एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट' में कहा कि सरकार का लक्ष्य 20% इथेनॉल सम्मिश्रण का था और इसे आगे बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि ई20 को लेकर फैलाई जा रही नकारात्मक खबरें एक सोची-समझी कहानी (Narrative) का हिस्सा हैं। कच्चा तेल आयात करना देश के चालू खाता घाटे (CAD) का बड़ा कारण है, जिसे बायोफ्यूल के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है।

क्यों हुआ था ई20 पेट्रोल पर विवाद?

देश में ई20 पेट्रोल पेश किए जाने के बाद से ही वाहन चालकों और उपभोक्ताओं के बीच इसे लेकर सवाल उठने लगे थे:

माइलेज घटने का दावा: कई वाहन चालकों ने शिकायत की थी कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है।

इंजन को नुकसान की चिंता: पुराने वाहनों के पुर्जों और इंजन पर एथेनॉल के असर को लेकर संशय जताया जा रहा था।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानकों के अनुरूप ई20 से इंजन खराब होने का कोई बड़ा प्रमाण नहीं मिला है और पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता केवल 3 से 5 प्रतिशत तक ही प्रभावित हो सकती है। सरकार ने इसे प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने वाला दूरदर्शी कदम बताया है।

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