'समय बर्बाद न करें': CJP प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का मामला, तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार क्यों?

याचिका का उल्लेख करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के संचालन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई से जुड़े वीडियो उपलब्ध हैं।;

Update: 2026-07-22 10:32 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बुधवार को अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे तत्काल सूचीबद्ध करने से मना कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के समय का अनावश्यक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और इस मामले को तत्काल सुनवाई योग्य नहीं माना गया।

‘हमें वीडियो देखने का समय नहीं’

याचिका का उल्लेख करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के संचालन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई से जुड़े वीडियो उपलब्ध हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि अदालत को वीडियो देखने में रुचि नहीं है और उसके पास ऐसे वीडियो देखने का समय नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

याचिका में आरोप लगाया गया था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग किया। याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और कथित पुलिस कार्रवाई पर उचित निर्देश जारी करने का आग्रह किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।

दिल्ली हाईकोर्ट भी पहले कर चुका है इनकार

इससे एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष भी इसी प्रकार की याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने भी तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की थी। अदालत ने कहा था कि हर मामले में न्यायालय को बीच में नहीं लाया जाना चाहिए और इस तरह की याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई का औचित्य नहीं बनता। इस प्रकार, अब तक दोनों प्रमुख अदालतों ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप से परहेज किया है।

संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प

कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग संसद की ओर बढ़े, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। घटनास्थल पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पथराव की घटनाएं सामने आईं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने बाद में हिंसा और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित विभिन्न आरोपों में कई प्राथमिकी भी दर्ज कीं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया।

बार एसोसिएशन ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा कि यदि निर्दोष छात्रों पर बल प्रयोग हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी घटनाओं में घायल हुए छात्रों के मामले की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जानी चाहिए ताकि तथ्यों का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।

CJP नाम की पृष्ठभूमि भी चर्चा में

इस घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम की उत्पत्ति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 15 मई को एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में एक टिप्पणी की थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर "कॉकरोच जनता पार्टी" नाम से एक अकाउंट शुरू किया, जिसने बाद में एक छात्र आंदोलन का रूप ले लिया। यह घटनाक्रम सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहा है, हालांकि इसका मौजूदा याचिका पर न्यायालय के निर्णय से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं बताया गया।

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