नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रस्तावित किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। किताब के अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन की घोषणा के बाद अब इसके भारतीय संस्करण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह सोनिया गांधी के इस संस्मरण को भारत में प्रकाशित नहीं कर रहा है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का यह बयान उसके अमेरिकी सहयोगी प्रकाशन संस्थान Alfred A. Knopf की ओर से 18 अगस्त को की गई घोषणा के कुछ सप्ताह बाद आया है। नॉफ ने बताया था कि सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में भारत में इसके प्रकाशन को लेकर पैदा हुई स्थिति ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
तीन संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की अटकलें
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी के संस्मरण में भारत की राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील विषयों पर उनके विचार शामिल हैं। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), चीन के साथ सीमा विवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की कार्यशैली प्रमुख बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि किताब में सोनिया गांधी ने भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ और सीमा पर मौजूदा परिस्थितियों को लेकर अपनी राय रखी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और सरकार के काम करने के तरीके पर भी उन्होंने टिप्पणी की है। केंद्र सरकार की प्रमुख नीतियों, राष्ट्रीय मुद्दों और भारत के सामाजिक ताने-बाने पर आरएसएस के प्रभाव को लेकर भी संस्मरण में उनके विचार होने की बात सामने आई है। हालांकि, किताब की पूरी सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए इसमें शामिल दावों और टिप्पणियों की आधिकारिक पुष्टि प्रकाशन से पहले ही संभव हो सकेगी।
कांग्रेस नेताओं ने प्रकाशक पर उठाए सवाल
भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर पेंगुइन इंडिया के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रकाशक के फैसले की आलोचना की। गहलोत ने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या वजह या दबाव है, जिसके कारण भारत में उस किताब को प्रकाशित नहीं किया जा रहा, जिसे दुनिया के दूसरे हिस्सों में प्रकाशित किया जा रहा है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ कदम करार दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ, लोकसभा सांसद गौरव गोगोई, सेवादल प्रमुख श्रीनिवास बीवी और महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा ने भी प्रकाशक के रुख पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि किताब विदेशों में प्रकाशित हो रही है तो भारत में इसके प्रकाशन को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
बीजेपी ने भी साधा निशाना
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों के बीच अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी आईटी सेल के पूर्व प्रमुख अमित मालवीय ने पेंगुइन के बयान पर सवाल उठाते हुए एक्स पर लिखा कि यह भी दिलचस्प है कि पेंगुइन इंडिया को सोनिया गांधी के संस्मरण के लिए फैक्ट-चेक की जरूरत महसूस हुई। मालवीय ने सवाल उठाया कि आखिर प्रकाशक को किस चीज की तथ्य-जांच की आवश्यकता महसूस हुई—लेखिका की याददाश्त की या फिर तथ्य और कल्पना के बीच की सीमा की। उनके बयान को कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी के पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है।
किताब के भारत में प्रकाशन पर नजर
सोनिया गांधी की प्रस्तावित किताब के अंतरराष्ट्रीय संस्करण की घोषणा के बाद इसकी विषय-वस्तु को लेकर राजनीतिक दिलचस्पी पहले से बनी हुई है। अब भारत में प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के स्पष्टीकरण ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘Belonging: A Journey of Love’ का भारत में कोई अन्य प्रकाशक सामने आएगा या किताब केवल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीमित रहेगी। किताब के आधिकारिक रूप से जारी होने के बाद ही इसके अंदर किए गए दावों और राजनीतिक टिप्पणियों की पूरी तस्वीर सामने आएगी।