नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति की है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) समेत विभिन्न परीक्षाओं के संचालन और कथित पेपर लीक को लेकर NTA लगातार सवालों के घेरे में रही है। नई नियुक्तियों को एजेंसी के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, 2005 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) अधिकारी अंशुमन शर्मा को NTA में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल पांच वर्ष का होगा। इसके साथ ही एजेंसी में तीन अधिकारियों को निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है।
तीन अधिकारियों को निदेशक की जिम्मेदारी
NTA में सत्य एस., रवि कुमार सिंह और प्रसन्ना वेंकटेश वी. को निदेशक नियुक्त किया गया है। सत्य भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के अधिकारी हैं, जबकि रवि कुमार सिंह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और प्रसन्ना वेंकटेश वी. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं। इसके अलावा कार्मिक मंत्रालय के 27 अगस्त को जारी एक अन्य आदेश के तहत 2016 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) अधिकारी अमित समदरिया को NTA में संयुक्त निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है।
परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
NTA में ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब केंद्र सरकार ने एजेंसी की परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलावों की घोषणा की है। सरकार का लक्ष्य परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। प्रस्तावित बदलावों में प्रश्नपत्रों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चार-स्तरीय पेपर जांच प्रक्रिया लागू करना शामिल है। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े करीब 600 विशेषज्ञों को हटाने और उनकी जगह विषय-विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में संभावित खामियों को कम करना और प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित करने तक की व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है।
NEET को लेकर NTA पर उठे थे सवाल
पिछले कुछ समय में NEET और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं को लेकर सामने आई शिकायतों ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी थी। कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद छात्रों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए। इस पूरे विवाद के बीच परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और संस्थागत सुधार की मांग भी तेज हुई। सरकार अब प्रशासनिक बदलावों के साथ-साथ परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा पर जोर दे रही है।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स
पेपर लीक के आरोपों और छात्रों के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। छह सदस्यीय टास्क फोर्स को सार्वजनिक परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए सुझाव और सिफारिशें तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें परीक्षा सुरक्षा, तकनीक के इस्तेमाल, संस्थागत व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है।
टास्क फोर्स ने भी मांगे लोगों से सुझाव
शुक्रवार को नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स ने सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार को लेकर छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक संगठनों समेत आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों में परीक्षा में गड़बड़ी रोकने, जवाबदेही तय करने और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया है। माना जा रहा है कि NTA में नई नियुक्तियां और परीक्षा प्रणाली में प्रस्तावित बदलाव मिलकर देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।