भारत खरीदेगा अमेरिका से 100 जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल, 4.57 करोड़ डॉलर का होगा सौदा

अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने इस समझौते को भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध में परखे जा चुके जेवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है। उनके मुताबिक, इस सौदे से दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग और संयुक्त उत्पादन की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।;

Update: 2026-08-29 04:59 GMT

नई दिल्ली : भारत अपनी सेना की युद्ध क्षमता और बख्तरबंद खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी में है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को बताया कि भारत और अमेरिका के बीच जेवलिन सिस्टम की खरीद को लेकर प्रारंभिक समझौता हो गया है। हालांकि, भारत के रक्षा मंत्रालय की ओर से इस सौदे को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के अनुसार, प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत करीब 4.57 करोड़ डॉलर है। इस पैकेज के तहत भारत को करीब 100 जेवलिन मिसाइल राउंड और संबंधित उपकरण मिलने हैं। समझौते में भविष्य में दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन की संभावना भी शामिल है।

भारत ने Letter of Offer and Acceptance पर किए हस्ताक्षर

अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि भारत ने जेवलिन सिस्टम की खरीद के लिए Letter of Offer and Acceptance (LOA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है। अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने इस समझौते को भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध में परखे जा चुके जेवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है। उनके मुताबिक, इस सौदे से दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग और संयुक्त उत्पादन की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

संयुक्त उत्पादन की भी संभावना

जेवलिन सिस्टम अमेरिका में RTX और लॉकहीड मार्टिन के संयुक्त उद्यम द्वारा तैयार किया जाता है। भारत के लिए प्रस्तावित सौदे में सिर्फ मिसाइलों की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य में सहयोग का रास्ता भी खुला है। संयुक्त उत्पादन की संभावना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और घरेलू रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भारत को आधुनिक एंटी-टैंक हथियार प्रणाली के साथ उत्पादन और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में भी लाभ मिल सकता है।

एक सैनिक कर सकता है सिस्टम का संचालन

जेवलिन एक उन्नत, मध्यम दूरी की फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है। इसकी खासियत यह है कि इसे एक सैनिक भी संचालित कर सकता है। इसे युद्धक्षेत्र में बख्तरबंद वाहनों, टैंकों और मजबूत सैन्य ठिकानों जैसे लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। जेवलिन का इस्तेमाल अमेरिकी सेना के अलावा अमेरिका के कई सहयोगी देशों की सेनाएं भी करती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेनी सेना द्वारा भी इस प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी युद्धक क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हुई है।

पैकेज में प्रशिक्षण और तकनीकी उपकरण भी शामिल

प्रस्तावित सौदे के पैकेज में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े कई सहायक उपकरण और सेवाएं भी शामिल हैं। इनमें प्रशिक्षण उपकरण, मिसाइल सिमुलेशन राउंड, बैटरी कूलेंट यूनिट, तकनीकी मैनुअल, स्पेयर पार्ट्स और लाइफ-साइकिल सपोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा सिस्टम इंटीग्रेशन और टेस्टिंग से जुड़ी सहायता भी पैकेज का हिस्सा है। इससे भारतीय सेना को सिस्टम के संचालन और रखरखाव में सहायता मिलने की उम्मीद है।

नवंबर 2025 में अमेरिका ने दी थी मंजूरी

अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2025 में भारत को FGM-148 Javelin हथियार प्रणाली बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने संभावित सौदे की जानकारी जारी की थी। उस समय अनुमानित लागत करीब 4.57 करोड़ डॉलर बताई गई थी। प्रस्ताव में भारत के लिए 100 जेवलिन राउंड, मूल्यांकन के लिए एक अतिरिक्त मिसाइल और 25 जेवलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट शामिल थे। अमेरिका ने बिक्री को यह कहते हुए उचित ठहराया था कि भारत हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया में स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। जेवलिन सौदे को भारत-अमेरिका के बढ़ते रक्षा सहयोग की एक और कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता मजबूत होने के साथ दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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