राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोले- पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलाना जनता की गाड़ी से चोरी

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि देश में पेट्रोल के अंदर वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है और निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी।;

Update: 2026-11-07 05:48 GMT

नई दिल्ली: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर सवाल उठने लगे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पेट्रोल में निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाए जाने के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के उपभोक्ता पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं, लेकिन उनकी गाड़ियों में तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाया जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे जनता की गाड़ी से पेट्रोल की चोरी करार देते हुए सवाल किया कि निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

यह विवाद कर्नाटक सरकार की ओर से पेट्रोल के नमूनों की जांच के बाद सामने आया है। राज्य सरकार का दावा है कि जांच में कई तेल कंपनियों के पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। इस मामले में सरकार ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित उपभोक्ताओं को मुआवजा देने की मांग की है।

कर्नाटक में 63 नमूनों की जांच, कई में ज्यादा एथेनॉल

कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने प्रेस कांफ्रेंस में पेट्रोल के नमूनों की जांच के नतीजे साझा किए। उन्होंने बताया कि राज्य में पेट्रोल के 63 नमूनों की जांच कराई गई। सरकार के मुताबिक, जांच में कई कंपनियों के ई20 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई। मंत्री के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के एक नमूने में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत दर्ज की गई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के नमूने में यह 30.5 प्रतिशत रही। वहीं, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के नमूने में 26.5 प्रतिशत एथेनॉल मिला। इसके अलावा नायरा के पेट्रोल में 26.1 प्रतिशत और शेल के नमूने में 25.5 प्रतिशत एथेनॉल पाए जाने का दावा किया गया है। बेंगलुरु सहित राज्य के विभिन्न जिलों से लिए गए नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने की बात कही गई है।

राहुल गांधी बोले- 14 में से 11 नमूनों में सीमा से ज्यादा एथेनॉल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कर्नाटक सरकार की जांच का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के सात जिलों से पेट्रोल के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच कराई गई। उनके मुताबिक, जांच किए गए 14 नमूनों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई। कांग्रेस नेता ने इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नमूनों में क्रमशः 31.2 प्रतिशत और 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पेट्रोलियम, नायरा और शेल जैसी कंपनियों के पेट्रोल में भी निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल पाया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में एथेनॉल की मात्रा का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले को उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।

माइलेज घटने और इंजन पर असर की आशंका

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उपभोक्ता पेट्रोल की कीमत चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं मिल रही कि उनके वाहन में कितना एथेनॉल मिलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने पर गाड़ियों के माइलेज में कमी आ सकती है और इंजन संबंधी समस्याओं की आशंका भी बढ़ सकती है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को ईंधन में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा क्यों नहीं बताई जा रही है। उनके मुताबिक, जानकारी के अभाव में उपभोक्ताओं के पास अपनी जरूरत और वाहन के अनुरूप ईंधन चुनने का विकल्प नहीं रह जाता।

प्रधानमंत्री से कार्रवाई और जवाब की मांग

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि देश में पेट्रोल के अंदर वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है और निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी। उन्होंने सरकार की एथेनॉल नीति के लाभार्थियों को लेकर भी सवाल उठाए और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को बहस की चुनौती दी। कांग्रेस नेता ने कहा कि उपभोक्ताओं को पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए और पेट्रोल की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, कर्नाटक सरकार और राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया तथा जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को लेकर उठे सवालों ने ईंधन की गुणवत्ता, उपभोक्ता अधिकारों और सरकारी नीति पर नई बहस शुरू कर दी है।

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