सूखे के मुद्दे पर केंद्र से सिर्फ औपचारिक बातचीत कर रही कर्नाटक सरकार: कुमारस्वामी

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार सूखा प्रबंधन के मुद्दे पर केवल नाम मात्र के लिए केंद्र सरकार से बात कर रही है और किसानों को राहत दिलाने के लिए ईमानदार प्रयास नहीं कर रही है।;

Update: 2026-11-06 18:46 GMT

बेंगलुरु। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार सूखा प्रबंधन के मुद्दे पर केवल नाम मात्र के लिए केंद्र सरकार से बात कर रही है और किसानों को राहत दिलाने के लिए ईमानदार प्रयास नहीं कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से आर्थिक सहायता मांगने के बावजूद न तो मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और न ही उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर राज्य के लिए मदद मांगी है।

बेंगलुरु के विजयनगर स्थित भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) परिसर में आयोजित 71वें कर्नाटक राज्योत्सव समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार पिछले दो महीनों से केवल केंद्र को मुआवजा मांगने वाले पत्र लिखती रही है।

उन्होंने कहा कि सूखा राहत की मांग पहले 3,000 करोड़ रुपए थी, जो बाद में बढ़कर 26,000 करोड़ रुपए हो गई, लेकिन राज्य की जरूरतों को समझाने के लिए प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया।

दिल्ली में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ले जाने के सरकार के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को वास्तव में विश्वास में लेने की कोशिश किए बिना ऐसा कदम उठाया जा रहा है।

कुमारस्वामी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि जब किसान इसी तरह की कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, तब उन्होंने केंद्र की वित्तीय सहायता का इंतजार किए बिना राज्य के कर राजस्व से 25,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण माफ किए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भारत के राष्ट्रपति से मिलकर ऋण राहत अधिनियम को मंजूरी दिलाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि वर्तमान उपमुख्यमंत्री भी उस समय उनकी सरकार का हिस्सा थे।

कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं पर निशाना साधते हुए कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

उन्होंने शक्ति योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा सुविधा देने के बाद बस किराए में 33 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी किए जाने पर सवाल उठाया।

दूध की कीमत में 8 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा कि यदि इसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है तो वह इसका स्वागत करेंगे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक मूल्य वृद्धि से नंदिनी दूध की बिक्री प्रभावित हो सकती है और निजी डेयरी कंपनियों को बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा कथित तौर पर उन्हें 'गांव का मूर्ख' और 'बुद्धिहीन व्यक्ति' कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने पलटवार किया।

उन्होंने कहा, "मैं वास्तव में मूर्ख हूं, क्योंकि मैंने किसानों के 25,000 करोड़ रुपए के कर्ज माफ किए थे।"

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर मैं उनकी तरह बुद्धिमान होता, तो उन 25,000 करोड़ रुपए को सड़कों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च करता और 30 से 40 प्रतिशत कमीशन भी लेता।"

उन्होंने प्रियंक खड़गे को अपने आरोप साबित करने की चुनौती देते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति में आने के बाद या मुख्यमंत्री रहते कभी भी रियल एस्टेट का कोई कारोबार नहीं किया।

कुमारस्वामी ने कहा कि राजनीति में प्रवेश करने से पहले, जब वह फिल्म उद्योग से जुड़े थे, तब उन्होंने बिदादी के पास 45 एकड़ जमीन खरीदी थी।

अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ट्रस्ट के नाम पर सरकारी जमीन का दुरुपयोग किया गया। उनका दावा था कि एयरोस्पेस पार्क विकसित करने और कलबुर्गी में स्मारक बनाने के नाम पर सरकारी भूमि का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने प्रियंक खड़गे को सलाह दी कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले उन्हें नैतिक मानकों का पालन करना चाहिए।

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