महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज: 2029 से पहले 33% कोटा, लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी

इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को एनडीए सहयोगियों और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। सरकार का लक्ष्य है कि इस संवैधानिक बदलाव के लिए आवश्यक समर्थन जुटाया जाए, ताकि संसद में बिल आसानी से पास हो सके।

Update: 2026-03-24 05:59 GMT
नई दिल्‍ली: Women Reservation Amendment Bill: केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो अहम विधेयक (बिल) लाए जाने की तैयारी है। इन प्रस्तावित बदलावों के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्तों में संशोधन किया जाएगा, जिससे लंबे समय से लंबित यह योजना जमीन पर उतर सके। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती हैं। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस बड़े बदलाव को लेकर सरकार सहमति बनाने की कोशिश में जुटी है।

अमित शाह ने शुरू की राजनीतिक कवायद


इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को एनडीए सहयोगियों और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। सरकार का लक्ष्य है कि इस संवैधानिक बदलाव के लिए आवश्यक समर्थन जुटाया जाए, ताकि संसद में बिल आसानी से पास हो सके। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (शरद पवार गुट), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और एआईएमआईएम जैसे दलों से बातचीत की है। इसके अलावा बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी संपर्क किया गया है। हालांकि, कांग्रेस के साथ अभी औपचारिक चर्चा बाकी है।

दो बिलों के जरिए होगा रास्ता साफ


सरकार जिन दो विधेयकों को लाने की तैयारी कर रही है, उनमें पहला बिल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन से जुड़ा होगा। दूसरा बिल परिसीमन (Delimitation) कानून में बदलाव से संबंधित होगा। इन दोनों बिलों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, क्योंकि यह संवैधानिक संशोधन से जुड़े विषय हैं। यही कारण है कि सरकार विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है।

2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव


महिला आरक्षण कानून, जिसे 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित किया गया था, उसकी सबसे बड़ी शर्त यह थी कि इसे नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जाएगा। अब सरकार इस शर्त में बदलाव करना चाहती है। प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे पूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी और 2029 से पहले महिला आरक्षण लागू करना संभव हो सकेगा।

SC/ST महिलाओं को भी हिस्सा


प्रस्तावित योजना के तहत लोकसभा की 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा इस तरह तैयार किया जा रहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को उनके मौजूदा कोटे के भीतर ही प्रतिनिधित्व मिले। हालांकि, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान फिलहाल इस प्रस्ताव में शामिल नहीं किया गया है, जो भविष्य में राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है।

राज्य विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना


सरकार केवल लोकसभा तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इसी मॉडल को राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है। इसके तहत सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

2023 में पास हुआ था कानून, लेकिन लागू नहीं हुआ


महिला आरक्षण से जुड़ा कानून 2023 में संसद से पारित हुआ था। इसे संविधान के 106वें संशोधन के रूप में मंजूरी मिली थी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस पर हस्ताक्षर कर दिए थे। लोकसभा में यह बिल लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था, जो इसकी व्यापक राजनीतिक स्वीकृति को दर्शाता है। हालांकि, इसके बावजूद यह कानून अभी तक लागू नहीं हो पाया है, क्योंकि इसकी शर्तें पूरी नहीं हुई थीं।

सहमति बनाना बड़ी चुनौती

अब सरकार इन शर्तों में संशोधन कर महिला आरक्षण को जल्द लागू करना चाहती है। लेकिन इसके लिए संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना और सभी दलों के बीच सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती होगी। अगर सरकार इस प्रयास में सफल रहती है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती है। यह कदम भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करेगा।

Tags:    

Similar News