लोकसभा में पीएम मोदी बोले, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट स्वीकार नहीं, पश्चिम एशिया संकट से भारत पर असर

पीएम मोदी ने कहा कि इस युद्ध का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक है और भारत भी इससे सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Update: 2026-03-23 09:16 GMT

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक है और भारत भी इससे सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा ढांचे पर हमले, कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट पूरी तरह अस्वीकार्य है।

भारतीयों की सुरक्षा सबसे अहम

प्रधानमंत्री मोदी ने सदन को बताया कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों की मदद के लिए भारत के सभी राजनयिक मिशन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “हमारे मिशन प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद हर भारतीय तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि काफी संख्‍या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि संसद से भी दुनिया को यह संदेश जाना चाहिए कि इस संकट का जल्द समाधान जरूरी है।

ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान

पश्चिम एशिया को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संघर्ष का सीधा असर ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपनी ऊर्जा आयात नीति को मजबूत और विविध बनाया है। “पहले भारत 27 देशों से क्रूड ऑयल आयात करता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है,” उन्होंने कहा। इसके साथ ही देश की रिफाइनिंग क्षमता भी बढ़ी है और भारत के पास फिलहाल 53 लाख मीट्रिक टन का क्रूड ऑयल रिजर्व है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आवश्यक वस्तुओं से जुड़े जहाज सुरक्षित भारत पहुंचें। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे कई जहाजों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है।

इथेनॉल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर

पीएम मोदी ने बताया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को काफी बचत हो रही है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि “एनर्जी आज किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे भविष्य और सुरक्षित होगा।”

किसानों को राहत और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित

प्रधानमंत्री ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकट के समय भी किसानों पर बोझ नहीं पड़ने दिया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 3000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थी, लेकिन भारत में किसानों को यह 300 रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराई गई। उन्होंने यह भी कहा कि देश में खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता है और खरीफ सीजन की बुवाई को लेकर सरकार पूरी तरह तैयार है।

डीजल पर निर्भरता कम करने के प्रयास

पीएम मोदी ने बताया कि सरकार ने किसानों को 22 लाख से अधिक सोलर पंप उपलब्ध कराए हैं, जिससे उनकी डीजल पर निर्भरता कम हुई है। यह कदम न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सकारात्मक है।

बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस

आने वाले गर्मी के मौसम को देखते हुए प्रधानमंत्री ने बिजली की बढ़ती मांग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पावर जेनरेशन से लेकर सप्लाई तक पूरे सिस्टम की निगरानी की जा रही है। भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में हुए विस्तार को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में सोलर पावर क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 100 गीगावाट से अधिक हो गई है। साथ ही, बायोगैस प्लांट और न्यूक्लियर एनर्जी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार अगले पांच वर्षों में नई पावर कैपेसिटी जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

कूटनीति ही समाधान का रास्ता

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत शुरू से ही इस संघर्ष को लेकर चिंतित रहा है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील करता रहा है। उन्होंने कहा कि “ऊर्जा ढांचे पर हमले, कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट पूरी तरह अस्वीकार्य है।” उन्होंने जोर दिया कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। भारत इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रहा है और सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है।

सरकार की बहु-स्तरीय रणनीति

प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीतियां बनाई हैं। एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी गठित किया गया है, जो रोजाना बैठक कर स्थिति की समीक्षा करता है। उन्होंने कहा कि “साझा प्रयासों और समन्वय के जरिए हम इस चुनौती का बेहतर तरीके से सामना कर पाएंगे।”

Tags:    

Similar News