लाल किले से PM मोदी का बड़ा संदेश: ‘हथियारबंद नक्सल गए, दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा’

प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद पीएम मोदी ने तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान हुआ। उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई। इस साल का भाषण उनकी स्वतंत्रता दिवस की पिछली कुछ स्पीच की तुलना में छोटा रहा।;

Update: 2026-08-15 04:23 GMT

नई दिल्ली: Independence Day 2026: देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया। करीब 76 मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य से लेकर युवाओं, महिला आरक्षण, आत्मनिर्भरता, नक्सलवाद और बदलती वैश्विक परिस्थितियों तक कई मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद पीएम मोदी ने तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान हुआ। उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई। इस साल का भाषण उनकी स्वतंत्रता दिवस की पिछली कुछ स्पीच की तुलना में छोटा रहा। इससे पहले 2022 में उन्होंने 74 मिनट, 2014 में 65 मिनट और 2017 में 56 मिनट का संबोधन दिया था।

‘हथियारबंद नक्सल गए, दिमागी नक्सल मौजूद’

पीएम मोदी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कहा कि सरकार ने देश से नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था। उनके मुताबिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास की गतिविधियां बढ़ी हैं और वहां विकास का तिरंगा लहरा रहा है। हालांकि, उन्होंने लोगों को सावधान रहने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सल तो चले गए, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अभी मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने और युवाओं को भटकाने के मौके तलाशते हैं। पीएम ने कहा कि ऐसे तत्व हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाश रहे हैं। इसलिए उन्हें पहचानना और अलग-थलग करना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को विकसित राष्ट्र के निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि देश की दिशा तय हो चुकी है और अब लक्ष्य हासिल करने के लिए गति बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने वर्क कल्चर और सोच में बदलाव की आवश्यकता बताई। पीएम ने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो सके, उन्हें आने वाले पांच से सात वर्षों में पूरा करने का प्रयास करना होगा। उनके मुताबिक अब देश को छोटे सपनों से आगे बढ़कर बड़े लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।

एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग

प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। इसका उद्देश्य युवाओं को तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए कई प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू करने की घोषणा भी की गई। सरकार का लक्ष्य ऐसे युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, जिन्हें महंगी कोचिंग की सुविधा आसानी से नहीं मिल पाती।

महिला आरक्षण को लागू करने की अपील

महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर पीएम मोदी ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की बात दोहराई। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में सहयोग करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे महिलाओं को उनका अधिकार देने की प्रक्रिया में शामिल हों।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता को देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत से जोड़ते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर होकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई चीजें सस्ती और जल्दी उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमताएं विकसित नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा खुद करने की क्षमता विकसित करनी होगी। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को उन्होंने इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

आपदाओं के बीच रास्ता निकालने का संदेश

प्रधानमंत्री ने देश के सामने आने वाली प्राकृतिक और अन्य आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए मजबूत संकल्प जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिन परिस्थितियों और आपदाओं के बीच से भी रास्ता निकालने की क्षमता विकसित होती है। पीएम ने कहा कि अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। देश को बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने सोच का दायरा भी बढ़ाते हैं।

ग्लोबलाइजेशन पर भी बोले पीएम

प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए आत्मनिर्भरता की अपनी पुरानी अपील को याद किया। उन्होंने कहा कि जब वह आत्मनिर्भरता की बात करते थे, तब कुछ लोग सवाल उठाते थे कि वैश्वीकरण के दौर में यह कैसे संभव होगा। पीएम मोदी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं और अब दुनिया में वैश्वीकरण की चर्चा पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने संकेत दिया कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत करना और आत्मनिर्भर बनना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

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