पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थानंतरण भत्ते का नया फार्मूला घोषित किया

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के एक कोने से दूसरे कोने में स्थानांतरित होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण भत्ते का नया फार्मूला घोषित किया।;

Update: 2026-08-28 18:20 GMT

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को राज्य के एक कोने से दूसरे कोने में स्थानांतरित होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण भत्ते का नया फार्मूला घोषित किया।

सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह नया स्थानांतरण भत्ता फार्मूला (समग्र स्थानांतरण एवं पैकिंग अनुदान) राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए दशकों पुरानी स्थानांतरण भत्ता प्रणाली का स्थान लेगा।

उनके अनुसार, नए स्थानांतरण फार्मूले के तहत, वित्तीय राहत एकमुश्त अनुदान के रूप में दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह राशि अधिकतम 50,000 रुपए या मूल वेतन का 80 प्रतिशत में से जो भी कम हो, वो होगी। संबंधित कर्मचारियों को स्थानांतरण भत्ता राशि प्राप्त करने के लिए कोई रसीद प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।

अपने बयान में, मुख्यमंत्री ने नए स्थानांतरण भत्ता फार्मूले के दायरे का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों का स्थानांतरण उनके वर्तमान पोस्टिंग स्थान से 30 किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी पर होगा, वे प्रस्तावित स्थानांतरण भत्ते की पूरी राशि के हकदार होंगे। इसके विपरीत, 30 किलोमीटर से कम दूरी पर स्थानांतरित होने वालों को राशि का एक तिहाई हिस्सा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नई स्थानांतरण योजना सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर भी लागू होगी जो सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक स्थानों पर जाते हैं।

अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार अपने समर्पित राज्य सरकारी कर्मचारियों के कल्याण और खुशहाली के प्रति दृढ़ संकल्पित है, जो पश्चिम बंगाल की जनता की सेवा में अथक परिश्रम करते हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राज्य मंत्रिमंडल ने दशकों पुरानी स्थानांतरण अनुदान और पैकिंग भत्ता प्रणाली के स्थान पर सरलीकृत और बेहतर समग्र स्थानांतरण और पैकिंग अनुदान लागू करने को मंजूरी दे दी है।

राज्य सरकार के कर्मचारियों, विशेषकर सेवानिवृत्ति के कगार पर खड़े कर्मचारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका दावा था कि पूर्व स्थानांतरण भत्ता इतना कम था कि वह स्थानांतरण लागत के एक छोटे से हिस्से को भी कवर नहीं कर पाता था।

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