Gen Z से बोले मोहन भागवत: संवाद की कमी से जन्म लेते हैं आंदोलन, युवाओं की बात सुनना लोकतंत्र की जिम्मेदारी

मुंबई में Gen Z और Gen Alpha से संवाद के दौरान RSS प्रमुख ने कहा- विरोध लोकतंत्र का वैध माध्यम, युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनना जरूरी; शिक्षा, महिला नेतृत्व और भारत-पाक संबंधों पर भी रखी राय।;

Update: 2026-08-07 04:33 GMT

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में Gen Z और Gen Alpha के युवाओं से खुलकर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र, आंदोलन, शिक्षा, महिलाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे कई अहम विषयों पर अपने विचार रखे। भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध माध्यम है और यदि समय रहते युवाओं की बात सुनी जाती, तो कई आंदोलन टाले जा सकते थे।

'बातचीत की कमी से पैदा होते हैं आंदोलन'

भागवत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है। यदि सरकार और समाज समय पर लोगों की चिंताओं को सुनने में विफल रहते हैं, तो आंदोलन स्वाभाविक रूप से जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि आम सहमति बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को भी इसी नजरिए से देखना चाहिए। यदि पहले संवाद स्थापित किया गया होता, तो शायद स्थिति आंदोलन तक नहीं पहुंचती।

Gen Z की शिकायतों को बताया जायज

RSS प्रमुख ने युवाओं की मानसिकता को समझने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आज की पीढ़ी सवाल पूछती है और हर विषय पर जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी बिना अधिक सवाल किए बड़ों की बात मान लेती थी, लेकिन आज का युवा तर्क और पारदर्शिता चाहता है। भागवत ने कहा कि Gen Z की शिकायतें वास्तविक हैं और उन्हें गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने युवाओं की ईमानदारी पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें देशविरोधी बताना उचित नहीं है।

'प्रदर्शन संविधान सम्मत अधिकार, लेकिन तरीका भी महत्वपूर्ण'

भागवत ने स्पष्ट किया कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में विभाजन न हो, बल्कि समाधान की दिशा निकले। उन्होंने कहा कि यदि युवा आवाज उठा रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें किसी व्यवस्था से शिकायत है। इसलिए पहले उनकी बात समझना जरूरी है।

जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर भी रखी राय

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के संदर्भ में भागवत ने कहा कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके कारणों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया में उपद्रवियों के शामिल होने की खबरें पढ़ी हैं, लेकिन यदि उन्हें किसी पर भरोसा करना हो तो वे देश के युवाओं पर भरोसा करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर जताई चिंता

भागवत ने शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा कभी भी केवल व्यापार नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसमें सरकार के साथ समाज की भी समान भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद ही पाठ्यक्रम और अन्य सुधारों पर प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है।

महिला नेतृत्व और सामाजिक बदलाव पर विचार

महिलाओं की भागीदारी पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर और नेतृत्व की भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आवश्यकता है। समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि समाज में कोई नया सामाजिक ढांचा लाना है तो पहले समाज को उसके लिए तैयार करना होगा। बिना सामाजिक सहमति के बड़े बदलाव कठिनाइयां पैदा कर सकते हैं।

भारत-पाक संबंधों पर भी दिया संदेश

विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा कि युद्ध या तनाव की स्थिति में देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान संवाद से ही निकलते हैं।

IIMUN कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद

यह कार्यक्रम IIMUN (India's International Movement to Unite Nations) की ओर से आयोजित किया गया था। संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष ऋषभ शाह ने वर्ष 2011 में इसकी शुरुआत की थी। संगठन का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक मूल्यों, कूटनीति और वैश्विक मुद्दों के प्रति जागरूकता विकसित करना है।

मुंबई में आयोजित इस संवाद को RSS की नई पीढ़ी तक पहुंचने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हाल के महीनों में युवाओं से जुड़े आंदोलनों और शिक्षा संबंधी मुद्दों के बीच भागवत का यह संदेश राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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