आवारा मवेशियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा एनएचएआई, शेल्टर होम बनाने के निर्देश पर जताई चिंता
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आवारा कुत्तों और मवेशियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इसमें देशभर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम बनाने के निर्देश पर चिंता जताई गई है।;
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आवारा कुत्तों और मवेशियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इसमें देशभर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम बनाने के निर्देश पर चिंता जताई गई है।
एनएचएआई का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह निदेश दिया है कि वह पूरे देश में आवारा पशुओं के लिए शेल्टर होम बनाए, लेकिन ऐसा करने में लगभग सात हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। उसने तर्क दिया कि इसके बजाय स्थानीय जिला प्रशासन को शेल्टर होम बनाने चाहिए। याचिका में सुनवाई के लिए जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस संजय कुमार की एक स्पेशल बेंच बनाने की मांग की गई।
एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला रखा।
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि आवारा कुत्तों से जुड़ा एक मामला है। मैं एनएचएआई की ओर से एक याचिका दाखिल कर रहा हूं। एनएचएआई को देशभर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें लगभग 7,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। हमारा कहना है कि यह काम स्थानीय जिला-स्तरीय प्रशासन को करना चाहिए। हम इसे पूरे देश में नहीं कर सकते।"
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, एनएचएआई और अन्य एजेंसियों को यह निर्देश दिया था कि वे राज्य के हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा मवेशियों और जानवरों को हटाएं। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि उन्हें ऐसे शेल्टर में रखा जाए जहां उनकी ठीक से देखभाल हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या पर स्वतः संज्ञान लिया था।