सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में बड़ा मोड़, मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द; 29 सितंबर को फिर सुनवाई

सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में दिल्ली कोर्ट ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया है। मामले की 29 सितंबर को नए सिरे से सुनवाई होगी। जानें पूरा विवाद।;

Update: 2026-09-21 10:32 GMT

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में दिल्ली की अदालत ने सोमवार को अहम आदेश दिया। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उस पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोपों की जांच और एफआईआर की मांग वाली शिकायत को खारिज करने के मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।

क्या है सोनिया गांधी से जुड़ा पूरा मामला?

यह मामला शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी की याचिका से जुड़ा है। आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 की मतदाता सूची में शामिल था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता वर्ष 1983 में हासिल की थी। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने कथित अनियमितता और दस्तावेजों की जांच की मांग करते हुए एफआईआर दर्ज करने की अपील की थी।

हालांकि, ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और अदालत ने इन्हें अभी साबित हुआ तथ्य नहीं माना है। सोनिया गांधी की ओर से पहले इन आरोपों का विरोध किया गया था। उनके वकीलों ने संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए थे।

मजिस्ट्रेट का पुराना आदेश क्यों हुआ रद्द?

मजिस्ट्रेट अदालत ने सितंबर 2025 में शिकायत को खारिज करते हुए एफआईआर का आदेश देने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई।

अब विशेष अदालत ने माना कि निचली अदालत के आदेश में शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री पर पर्याप्त तरीके से विचार नहीं किया गया। अदालत ने इसे तथ्यों के संबंध में ‘नॉन-स्पीकिंग’ आदेश माना और कहा कि मामले पर नए सिरे से विचार किया जाना चाहिए।

नागरिकता के मुद्दे पर भी अदालत ने जताई आपत्ति

सत्र अदालत ने निचली अदालत की उस टिप्पणी पर भी सवाल उठाया, जिसमें नागरिकता से जुड़े पहलू पर उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर बात कही गई थी। अदालत के मुताबिक, शिकायत में लगाए गए आरोपों से संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं, इस पर स्पष्ट कारण दर्ज किए जाने चाहिए थे।

अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी को आरोपों पर प्रतिक्रिया देने और स्थिति रिपोर्ट पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था।

अब आगे क्या होगा?

मामला दोबारा मजिस्ट्रेट अदालत के सामने जाएगा। वहां शिकायत में लगाए गए आरोपों और पेश की गई सामग्री पर नए सिरे से सुनवाई होगी। इसके बाद अदालत नया और कारण स्पष्ट करने वाला आदेश पारित करेगी। अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा आदेश केवल पुराने मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश देता है। इससे सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं होते और न ही इस आदेश से अपने आप एफआईआर दर्ज हो जाती है।

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