लखनऊ में अवैध चैंबरों पर चला बुलडोजर; विरोध में सड़क पर उतरे वकील, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

हाईकोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ कचहरी परिसर में अवैध चैंबरों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई शुरू हो गई है। चैंबरों को ध्वस्त करने के लिए मौके पर बुलडोजर लगाए गए हैं। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है।;

Update: 2026-10-25 07:07 GMT

लखनऊ। हाईकोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ कचहरी परिसर में अवैध चैंबरों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई शुरू हो गई है। चैंबरों को ध्वस्त करने के लिए मौके पर बुलडोजर लगाए गए हैं। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है।

इस कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में अधिवक्ता सड़क पर धरने पर बैठ गए हैं। वकीलों ने चैंबर तोड़ने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार कचहरी परिसर में 200 से अधिक चैंबरों को ध्वस्त करने की तैयारी की गई है। कार्रवाई शुरू होने के बाद अधिवक्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि चैंबर उनके कामकाज का प्रमुख स्थान हैं और इन्हें हटाए जाने से बड़ी संख्या में वकीलों के सामने रोजी-रोटी तथा पेशे से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो जाएंगी।

मौके पर मौजूद एसीपी पश्चिमी धनंजय कुशवाहा ने बताया कि चैंबरों पर लाल निशान लगाए गए हैं और सभी चिह्नित चैंबरों को तोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा, "जितने चैंबर हैं, सब पर लाल निशान लगे हैं, सब तोड़े जाएंगे। कार्रवाई शुरू हो गई है। जब तक चैंबर टूटेंगे नहीं, कार्रवाई चलती रहेगी। इसकी कोई समय सीमा नहीं है। सात से आठ बुलडोजर लगाए गए हैं और अभी और बुलडोजर आ रहे हैं।"

कार्रवाई का विरोध कर रहे एक अधिवक्ता एसडब्ल्यू ने आईएएनएस से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रशासन बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए चैंबर तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कम से कम 2,000 अधिवक्ता इस कार्रवाई से प्रभावित हो रहे हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार के समय उनके सामने कामकाज और कार्यालय से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

अधिवक्ता ने कहा कि पहले वकीलों के बैठने और काम करने के लिए दूसरी जगह की व्यवस्था की जानी चाहिए थी, उसके बाद चैंबरों को हटाया जाना चाहिए था। चैंबर टूटने के बाद अधिवक्ता कहां बैठकर अपने मुवक्किलों से मिलेंगे और वकालत का काम कैसे करेंगे, इस पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे लोगों को न्याय दिलाने का काम करते हैं लेकिन अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें ही संघर्ष करना पड़ रहा है।


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