भारत के गांवों तक स्टारलिंक पहुंचाने की तैयारी? एलन मस्क ने दूरदराज के इलाकों के लिए जताई दिलचस्पी

भारत में इंटरनेट का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है, लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी का अंतर अभी भी बना हुआ है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या करीब 109.28 करोड़ थी।;

Update: 2026-08-22 07:31 GMT

नई दिल्ली: भारत के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी को लेकर एलन मस्क की कंपनी SpaceX की स्टारलिंक की दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। मस्क ने भारत के उन क्षेत्रों में स्टारलिंक इंटरनेट पहुंचाने की पेशकश की है, जहां पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए तेज और भरोसेमंद इंटरनेट उपलब्ध कराना मुश्किल है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जवाब में कहा कि स्टारलिंक भारत के सबसे कम सेवा पाने वाले क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण इलाकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

ग्रामीण भारत में अब भी कनेक्टिविटी की चुनौती 

भारत में इंटरनेट का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है, लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी का अंतर अभी भी बना हुआ है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या करीब 109.28 करोड़ थी। इनमें लगभग 44.09 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों से थे। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन डेंसिटी प्रति 100 आबादी करीब 48.31 थी, जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 126.80 था। इससे साफ है कि गांवों में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन कनेक्टिविटी के मामले में शहरों की तुलना में अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है।

पहाड़ों और सीमावर्ती इलाकों में स्टारलिंक की संभावना

सैटेलाइट इंटरनेट उन क्षेत्रों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल और महंगा होता है। भारत में ऐसे कई इलाके हैं जहां भौगोलिक परिस्थितियां पारंपरिक नेटवर्क के विस्तार में चुनौती पैदा करती हैं। इनमें पहाड़ी क्षेत्र, सीमावर्ती गांव, द्वीप, घने जंगलों के बीच बसे इलाके और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट आधारित सेवा ऐसे स्थानों पर जमीन पर बड़े नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत कम कर सकती है।

स्टारलिंक ने Gen-2 नेटवर्क के लिए फिर मांगी मंजूरी

मस्क का बयान ऐसे समय आया है जब उनकी कंपनी SpaceX की स्टारलिंक ने भारत में अपने अगली पीढ़ी के Gen-2 सैटेलाइट नेटवर्क के लिए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र यानी IN-SPACe से दोबारा मंजूरी मांगी है। Gen-2 नेटवर्क में कई नई तकनीकी क्षमताएं शामिल होने की बात कही जा रही है। इनमें Direct-to-Device (D2D) तकनीक भी अहम है। इसके जरिए भविष्य में सामान्य स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने की संभावना पैदा हो सकती है। हालांकि, इसके लिए संबंधित नियामकीय और तकनीकी मंजूरियां जरूरी होंगी।

पहले भी मिल चुका है सैटेलाइट संचार लाइसेंस

भारत में स्टारलिंक की मौजूदगी की कोशिश नई नहीं है। कंपनी को भारत में सैटेलाइट संचार सेवा उपलब्ध कराने के लिए GMPCS लाइसेंस पहले ही मिल चुका है। हालांकि, Gen-2 नेटवर्क को लेकर अलग नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता है। बताया गया है कि स्टारलिंक का पिछला Gen-2 आवेदन तकनीकी आवश्यकताओं और प्रस्तावित फ्रीक्वेंसी बैंड से जुड़ी आपत्तियों के कारण आगे नहीं बढ़ पाया था। अब कंपनी नए आवेदन के जरिए अपने अगली पीढ़ी के नेटवर्क को भारत में लागू करने की कोशिश कर रही है।

340 से 615 किलोमीटर की ऊंचाई पर होंगे सैटेलाइट

Starlink का Gen-2 नेटवर्क करीब 340 से 615 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करने वाले सैटेलाइटों पर आधारित होगा। कंपनी इस नेटवर्क के जरिए ज्यादा उन्नत कनेक्टिविटी और नई सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। अगर नियामकीय मंजूरियां मिलती हैं, तो भारत के ऐसे क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट की भूमिका बढ़ सकती है जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क का विस्तार अभी भी सीमित है।

आपदा के समय भी मददगार 

सैटेलाइट कनेक्टिविटी का इस्तेमाल केवल सामान्य इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रहेगा। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान इसका महत्व और बढ़ सकता है। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और चक्रवात जैसी परिस्थितियों में मोबाइल टावर या जमीन पर बिछे फाइबर नेटवर्क के क्षतिग्रस्त होने से संचार व्यवस्था बाधित हो सकती है। ऐसे समय में सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध करा सकती है। इससे राहत और बचाव एजेंसियों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को भी संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

सैटेलाइट इंटरनेट का बढ़ सकता है दायरा

एलन मस्क की ताजा टिप्पणी और स्टारलिंक की Gen-2 नेटवर्क के लिए नई मंजूरी की कोशिश से संकेत मिलता है कि कंपनी भारत के ग्रामीण और कम कनेक्टिविटी वाले बाजार को महत्वपूर्ण मान रही है। हालांकि, सेवा के विस्तार से पहले नियामकीय मंजूरियों और तकनीकी मानकों का पालन जरूरी होगा। यदि ये प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं भारत के उन हिस्सों तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने में भूमिका निभा सकती हैं, जहां पारंपरिक टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर की पहुंच अभी सीमित है।

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