नई दिल्ली : पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच विवाद तेज हो गया है। कर्नाटक सरकार की ओर से ई20 पेट्रोल में निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथनॉल मिलाए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन दावों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की ओर से सप्लाई किए जा रहे ई20 पेट्रोल के नमूनों की जांच में एथनॉल की मात्रा तय मानक के अनुरूप पाई गई है। दूसरी ओर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार की ई20 नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे '420' नीति बताते हुए आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं की गाड़ियों से पेट्रोल की चोरी हो रही है।
893 नमूनों की जांच में तय मानक के अनुरूप मिला एथनॉल
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 893 नमूनों की जांच की गई। इनमें एथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत के निर्धारित मानक के अनुरूप मिली। मंत्रालय ने विशेष रूप से कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कहा कि सितंबर में वहां से लिए गए 56 नमूनों की जांच में भी एथनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच पाई गई। दरअसल, एक दिन पहले कर्नाटक सरकार ने आरोप लगाया था कि पेट्रोल के 63 नमूनों की जांच में कई कंपनियों के ई20 पेट्रोल में 30 प्रतिशत से अधिक एथनॉल मिला है। राज्य सरकार के इस दावे के बाद केंद्र ने जांच के तरीके और नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
कर्नाटक की जांच प्रक्रिया पर मंत्रालय ने उठाए सवाल
मंत्रालय के मुताबिक, पेट्रोल पंपों के निरीक्षण के दौरान एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाते हैं। इनमें से दो नमूने डीलर को, दो तेल कंपनी या संबंधित विभाग को और दो अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाते हैं। मंत्रालय का कहना है कि सितंबर में लिए गए नमूने राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से नामित कंपनी प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे, लेकिन अक्टूबर में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। मंत्रालय ने दावा किया कि राज्य से विस्तृत जानकारी मांगे जाने के बावजूद रिटेंशन नमूने, पेट्रोल पंप के हिसाब से विवरण और प्रयोगशाला रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गईं। तेल कंपनियों ने तीसरी पार्टी की प्रयोगशाला से जारी प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए हैं।
घनत्व के आंकड़ों को लेकर भी विवाद
मंत्रालय ने जांच रिपोर्ट में ईंधन के घनत्व का हवाला देते हुए स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई। उसके अनुसार, जिन नमूनों में 26 से 31 प्रतिशत एथनॉल होने का दावा किया गया, उनका घनत्व 0.742 से 0.749 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर दर्ज किया गया। वहीं, तेल कंपनियों के ई20 नमूनों में यह 0.752 से 0.760 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर रहा। मंत्रालय का तर्क है कि एथनॉल का घनत्व पेट्रोल से अधिक होता है। इसलिए मिश्रण में एथनॉल की मात्रा बढ़ने पर घनत्व भी बढ़ना चाहिए। ऐसे में कर्नाटक की तीसरी पार्टी की जांच में कम घनत्व दर्ज होने के कारण इन नमूनों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
माइलेज और मरम्मत खर्च के दावों को भी नकारा
ई20 पेट्रोल से उपभोक्ताओं पर सालाना 1.01 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने के आरोपों को भी मंत्रालय ने खारिज किया। इस अनुमान में करीब 62 हजार करोड़ रुपये का माइलेज नुकसान और 39 हजार करोड़ रुपये की वाहन मरम्मत लागत शामिल बताई गई थी। मंत्रालय ने अंतर-मंत्रालयी समिति, इंडियन ऑयल, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के अध्ययनों का हवाला दिया। उसके अनुसार, माइलेज पर असर वाहन की श्रेणी और इंजन की बनावट के हिसाब से अलग-अलग होता है। कुछ वाहनों में यह एक से दो प्रतिशत, जबकि कुछ में तीन से छह प्रतिशत तक हो सकता है। मंत्रालय का यह भी कहना है कि देश में 30 करोड़ से अधिक दोपहिया और चार करोड़ चारपहिया वाहन तीन साल से ज्यादा समय से ई20 ईंधन पर चल रहे हैं। बड़े पैमाने पर वाहनों के खराब होने की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। सरकार के मुताबिक, एथनॉल मिश्रण से 97 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और इससे किसानों को भी लाभ मिला है।
राहुल गांधी का सवाल- कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राज्य के सात जिलों से लिए गए नमूनों की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के दौरान 14 में से 11 नमूनों में एथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक मिली। राहुल के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक नमूने में एथनॉल 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नमूने में 30.5 प्रतिशत पाया गया। उन्होंने कहा कि बीपीसीएल, नायरा और शेल के नमूनों में भी निर्धारित सीमा से अधिक एथनॉल मिला। राहुल ने आरोप लगाया कि कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं ने रिपोर्ट में एथनॉल की मात्रा दर्ज नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पेट्रोल की कीमत चुका रहे हैं, तो उन्हें तय मानक से अधिक एथनॉल क्यों दिया जा रहा है। राहुल ने प्रधानमंत्री से ई20 नीति और पेट्रोल में एथनॉल की वास्तविक मात्रा पर जवाब मांगा। साथ ही पूछा कि निर्धारित सीमा से अधिक एथनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी और इस नीति का फायदा आखिर किसे मिल रहा है।