देश में श्रीराम के आचरण को जी रहे दो योगी, एक 'कर्मयोगी' मोदी और दूसरे सीएम योगी: सीपी राधाकृष्णन
भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि वास्तविक महानता सत्ता या पद में नहीं, बल्कि चरित्र बल और अपने कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा में होती है। आज प्रभु श्रीराम के चरित्र और उनके आचरण का अनुसरण देश में दो योगी कर रहे हैं, एक 'कर्मयोगी' नरेंद्र मोदी हैं और दूसरे यहां योगी आदित्यनाथ हैं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रामनगरी अयोध्या में आयोजित दसवें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।;
अयोध्या। भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि वास्तविक महानता सत्ता या पद में नहीं, बल्कि चरित्र बल और अपने कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा में होती है। आज प्रभु श्रीराम के चरित्र और उनके आचरण का अनुसरण देश में दो योगी कर रहे हैं, एक 'कर्मयोगी' नरेंद्र मोदी हैं और दूसरे यहां योगी आदित्यनाथ हैं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रामनगरी अयोध्या में आयोजित दसवें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
राम कथा पार्क में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने मिलकर राम मंदिर को हिंदुओं के आत्मसम्मान का प्रतीक बना दिया है और अयोध्या आज 'विरासत भी, विकास भी' विजन का एक साकार उदाहरण बन गई है। समारोह के दौरान 'आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या' की परिकल्पना भी जीवंत होती दिखी। राम कथा पार्क में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं अनुज लक्ष्मण जी का प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन हुआ। भावपूर्ण 'भरत मिलाप' के पश्चात प्रभु श्रीराम एवं माता जानकी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन और आरती-वंदन किया गया। त्रेतायुग की स्मृतियों को ताजा करते हुए प्रभु श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक भी संपन्न हुआ, जिसके साक्षी हजारों श्रद्धालु बने।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'हिंदू हृदय सम्राट' कहकर संबोधित किया। मुख्यमंत्री के साथ संसद के अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "हमारे हिंदू हृदय सम्राट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय संसद में मेरे सहयोगी हुआ करते थे। वह बिल्कुल युवा थे और मुझे अच्छी तरह याद है कि उनके भाषणों में उस समय भी वैसा ही ओज था, जितने ओजस्वी वह आज हैं।"
उपराष्ट्रपति ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी अपनी मां की यादों को साझा करते हुए बताया कि जब अशोक सिंघल ने रामशिला पूजन का आह्वान किया था, तब उनकी मां ने राम मंदिर के लिए अपने सिर पर ईंट ढोई थी और शिला पूजन का नेतृत्व किया था।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "उस समय मेरी मां ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि सुदूर दक्षिण, रामेश्वरम से चलकर उनका बेटा एक दिन देश का उपराष्ट्रपति बनेगा और राम जन्मभूमि पर इस समारोह का हिस्सा बनकर गर्व की अनुभूति करेगा।"
उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष और साधु-संतों की तपस्या के बाद राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर साकार हुआ है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे एक बेहद सामान्य कृषक परिवार से आते हैं और आज उपराष्ट्रपति बने हैं। यह केवल इसलिए संभव हुआ क्योंकि अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन चलाया गया और तमाम रामभक्तों ने इसके लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने कहा कि आज शताब्दियों के बाद युगों-युगों की साध पूरी हुई है। अगर राम जन्मभूमि पर राम मंदिर नहीं बनता, तो कहां बनता? उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश की सुधरी कानून व्यवस्था की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि पहले जब वे उत्तर प्रदेश आते थे, तो उन्हें सुरक्षित महसूस नहीं होता था। कानून-व्यवस्था पुलिस के नहीं, गुंडों के हाथों में होती थी। लेकिन आज यूपी में प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित है और यह महानतम उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है।
उन्होंने वाराणसी के एक व्यक्ति का उदाहरण दिया, जिसने अपराध की राह छोड़कर अब एक छोटे व्यापारी के रूप में बेखौफ अपना काम शुरू कर दिया है। उपराष्ट्रपति कहा कि जन्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता, व्यक्ति केवल अपने चारित्रिक बल से श्रेष्ठ बनता है, जैसे महर्षि वाल्मीकि ने एक सामान्य परिवार से आकर दुनिया को महानतम ग्रंथ रामायण दिया।
उपराष्ट्रपति ने यूपी की अर्थव्यवस्था की प्रगति पर बोलते हुए कहा कि आज यूपी देश की जीडीपी में 9 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। 2026-27 के लिए 9 लाख करोड़ रुपए से अधिक का ऐतिहासिक बजट मुख्यमंत्री की विकास दृष्टि को दर्शाता है और जल्द ही यह राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने वाला है।
प्रयागराज में आयोजित पिछले महाकुंभ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद एक भी अप्रिय घटना का न होना यूपी के सुरक्षित और विकसित मॉडल का प्रमाण है।
उन्होंने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए पूर्ण विश्वास जताया कि उनका राज्य 'विकसित भारत 2047' की यात्रा में सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा। उन्होंने अंत में कहा कि हमारा लक्ष्य दूसरों पर राज करना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर भारत को दुनिया की एक महाशक्ति बनाना है।